केंद्र के पैसे का खर्च करने में राज्य सरकार संवेदनहीन : अर्जुन मुंडा
ABN Bureau• 23 Oct, 2021
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रांची। भाजपा एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बहाने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। बैठक का उद्घाटनकर्ता केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार पर जनजातियों के विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही राशि खर्च नहीं करने का आरोप लगाया है। यह आयोजन डिबडीह स्थित कार्निवाल हॉल में किया गया था। उन्होंने राज्य सरकार पर जनजातियों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज के लिए कार्य नहीं हो रहा है। यह सरकार जनजातियों के लिए संवेदनहीन है। केन्द्र सरकार पैसा राज्य को भेजती है लेकिन राज्य सरकार खर्च नहीं कर पाती है। इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री को आग्रह किया जा चुका है। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए जारी की गई योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की बात की गई। उन्होंने कहा कि पहली बार हमारी केंद्र सरकार ने हमारे आदिवासी समाज से लोगों को देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है और मंत्रिमंडल में कुल 8 अनुसूचित जनजाति से आने वाले मंत्रियों को जगह दी है। प्रधानमंत्री की जन धन योजना उज्जवला तथा आयुष्मान योजना का लाभ पूरा देश उठा रहा है और अनुसूचित जनजाति का इससे काफी उद्धार हुआ है। उन्होंने जनजातियों के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस के 400 करोड़ होने के संबंध में मुख्यमंत्री को कई बार पत्र लिखे जाने के बाबजूद उसपर कोई पहल नहीं किये जाने पर दुख जताया।झारखंड में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पहली बार हम आदिवासियों को देश का नेतृत्व करने का मौका दिया है।केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने झारखंड में भ्रष्टाचार का बोलबाला होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की तरह झारखंड में भी जनता से किये वादे को यूपीए भूल गई है। भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में शिरकत करने पहुंची रेणुका सिंह ने झारखंड में जनजातियों की समस्या पर दुख जताते हुए कहा कि जिस राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री हों उस राज्य में अनुसूचित जनजाति आयोग तक ना हो इससे दुखद स्थिति क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार में एक प्रतिशत जनजाति हैं तो वहां अनुसूचित जनजाति आयोग है। वहीं, झारखंड में 22 प्रतिशत आदिवासियों की आबादी है तो यहां अनुसूचित जनजाति आयोग नहीं है इससे साफ है कि मुख्यमंत्री आदिवासी के प्रति चिंतित नहीं है।