टीम एबीएन, कर्रा। लोधमा बालसिरिंग में ख्रीस्तमिशनरीयों ने बिशप फिलिप टोपो ने पवित्र मिस्सा कराया। कहा जाता है कि 200 साल पहले सामाजिक तत्व मिशनरीयों को खदेड़ रहे थे, उसी समय मिशनरीयों ने भाग कर सपरिवार कारो नदी तट पहुंचे। कारो नदी में एक लंबा सा पेड़ गिर कर पुल के समान बना दिखाई दिया।
सभी मिशनरियों ने उसी पेड़ से बालसिरींग जंगल में प्रवेश कर गये। पेड़ पुन: पानी के धार में बह गया। जब सामाजिक तत्व पीछा कर कारो नदी के तट पर पहुंचे तो पानी बड़ी तेजी से बह रहा था। वे लोग पानी की तेज धार को देखकर हिम्मत नहीं किये और फिर पीछे हट गये। और तब मिशनरियों ने बाल सरिंग जंगल में अपना डेरा बसेरा किया था। उसी के संदर्भ में हरेक साल एक फरवरी को मिशनरियों के द्वारा बालसिरींग जंगल में (जहां डेरा बसेरा किया था) पवित्र स्थल के रूप में हरेक साल मिशा पूजा से देश की शांति प्रेम एकता सहानुभूति भाईचारगी के लिए पवित्र मिस्सा पूजा किया जाता है।