- सरकार स्वास्थ्य कर्मियों से वार्ता कर समस्या का हल निकाले : सीटू
टीम एबीएन, कोडरमा। झारखंड राज्य एनआरएचएम - जीएनएम अनुबंध कर्मचारी संघ एवं झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ के बैनर तले सेवा नियमित व समायोजन करने की मांग पर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल के ग्यारहवें दिन सदर अस्पताल परिसर में सिविल सर्जन कार्यालय के सामने धरना पर बैठे हड़ताली कर्मियों को सम्बोधित करते हुए सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि इस हड़ताल से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गया है। एएनएम, जीएनएम अनुबंध कर्मचारी पिछले 17 से 18 वर्ष से अनुबंध पर का काम कर रहे हैं। चुनाव के पहले उन्हें नियमित करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सरकार अब मुकर रही है। एक तरफ स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना महामारी के समय बीमारी से लड़ने वाले योद्धा के रुप में करोना वारियर्स कह कर, फुल-मालाएं पहना कर सम्मानित किया गया।
दूसरी ओर कोरोना का प्रकोप खत्म होते ही अनुबंध पर कार्यरत कई स्वास्थ्य कर्मियों को काम से हटा दिया गया। आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को तो काम ही नहीं मिला, लेकिन अनुबंध पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा जारी रखी गयी और उन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 2014 के नियमावली के तहत उनकी सेवाओं को नियमित किया जायेगा। इस आश्वासन के कई महीने गुजर गये हैं लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
अब राज्य की स्वास्थ्य सेवा के अनुबंधकर्मियों की जारी हड़ताल से राज्य में रिम्स और सदर अस्पताल सहित सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है। सीटू की झारखंड राज्य कमिटी स्वास्थ्य कर्मियों के नियमितीकरण की मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से अपील करती है कि वह इन स्वास्थ्य कर्मियों के सभी संगठनों से वार्ता कर जनहित में हड़ताल समाप्त कराये।
धरना में विशेष रूप से आमंत्रित पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि झारखंड के लोगों को सरकार से बहुत सारी उम्मीदें हैं। जिस प्रकार हेमंत सोरेन सरकार ने पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविका सहायिका, मनरेगा कर्मियों का मानदेय बढ़ाने के साथ राज्य सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किया। उसी तरह बड़ा दिल दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग के इन एनआरएचएम और संविदाकर्मियों की पर ध्यान देना चाहिए और वर्ष 2018 के नियमावली में संशोधन करते हुए इन्हें नियमित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए प्रयास करूंगी। झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र तिवारी ने कहा कि हड़ताल के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण 75 प्रतिशत कम हो गया है। प्रसव और सिजेरियन प्रभावित हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव कराने के लिए नर्सें मौजूद नहीं हैं। मरीजों को दवाएं देने के लिए कोई मौजूद नहीं है। लैब और एक्सरे टैक्निशयन के हड़ताल पर जाने से सभी तरह का जांच प्रभावित हुआ है।
24 जनवरी से दर्जनों हड़ताली राजभवन के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिसके कारण कई कर्मचारियों का स्वास्थ्य बिगड़ गया है और वे हॉस्पिटलाइज हैं। फिर भी सरकार के कानों में जू नहीं रेंग रही है। धरना में झारखंड राज्य एनआरएचएम - जीएनएम अनुबंध कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सागर रजनीश, सचिव इन्द्रदेव यादव, चंदन कुमार, अमृता यादव, पूनम कुमारी, अनीता देवी, करिश्मा, तमन्ना, रिकी, प्रेमलता, संगीता, अर्चना, जफर इकबाल, संतोष कुमार, मनोज कुमार झा, संजीव राजहंस सहित दर्जनों कर्मी शामिल थे।