Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
देश

मोदी पर आखिर क्या है बीबीसी का इरादा...

मोदी पर आखिर क्या है बीबीसी का इरादा...
विज्ञापन

डॉ वेदप्रताप वैदिक

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। बीबीसी की फिल्म को लेकर जमकर विवाद छिड़ा हुआ है। फिल्म का नाम है- इंडिया : द मोदी क्वेश्चन। यह फिल्म गुजरात में 2002 में हुए दंगों पर बनी है। मैंने अभी तक यह फिल्म देखी नहीं है लेकिन भारत के 300 से भी ज्यादा नेताओं, अफसरों और पत्रकारों ने बयान जारी करके इस फिल्म की भर्त्सना की है। इस फिल्म में गुजरात के दंगों और मुसलमानों की हत्या के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी के लिए जो कहा था, मौत का सौदागर, उस कथन को इसमें फिल्माया गया है।

भाजपा के नेता इस फिल्म की कड़ी भर्त्सना कर रहे हैं। वे बीबीसी को साम्राज्यवादी मानसिकता से ग्रस्त बता रहे हैं। उनका तर्क यह है कि जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ही मोदी को निर्दोष साबित कर दिया है तो बीबीसी किस खेत की मूली है कि वह सोनिया गांधी के तेजाबी शब्दों को फिल्माये। लंदन में रहनेवाले भारतीय इस फिल्म के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं और अदालत में भी जा रहे हैं लेकिन प्रामाणिक राय तो भी व्यक्त की जा सकती है जबकि पहले फिल्म को देख लिया जाए। लेकिन मुझे लगता है कि सच्चाई न इधर है और न ही उधर है। वह कहीं बीच में है।

यह तथ्य तो सबको पता है कि गुजरात के दंगों में हिंदू और मुसलमान, दोनों मारे गए। जब दंगा शुरू हुआ, तब किसी को पता नहीं था कि वह इतना भयंकर रूप ले लेगा। जाहिर है कि सरकार को भी कुछ अंदाज नहीं था कि यह रक्तपात उसके बूते के बाहर हो जाएगा। और फिर नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री बने अभी थोड़ा ही समय ही हुआ था। उन्हें शासन चलाने का पहले कोई अनुभव भी नहीं था। गुजरात के दंगों में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। उनमें मुसलमानों की संख्या बहुत ज्यादा थी।

अब 20-21 साल बाद उन दंगों की याद ताजा कराने के पीछे इरादा क्या है? क्या भारत के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दंगे करवाना है? जब से भारत में मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, क्या 2002 का गुजरात दोहराया गया है? क्या कहीं बड़े दंगे हुए हैं? यह ठीक है कि मोदीराज में मुसलमान डरे हुए हैं लेकिन इसका कारण वे स्वयं हैं। मोदी ने इधर पसमांदा मुसलमानों के उद्धार के लिए जो बातें कहीं हैं, यदि उन पर अमल हो जाए तो क्या कहने? मुस्लिम औरतों को तीन तलाक से मुक्ति किसने दिलाई है? भारत में अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है। 

जब भारत ने इंदिरा गांधी के आपातकाल का मुंह काला करके उन्हें दंडित कर दिया तो उसकी जागरूक जनता को डराने की हिम्मत किसमें है? देखना यह भी है कि इस फिल्म में जले-बुझे गोरे अंग्रेजों ने कहीं भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ऋषि सुनाक पर प्रकारांतर से तो हमला नहीं किया है? (लेखक, भारतीय विदेश परिषद नीति के अध्यक्ष हैं।)

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 11,903