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पतरातू घाटी बन रही झारखंड का जोशीमठ!

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पतरातू घाटी बन रही झारखंड का जोशीमठ!
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  • पतरातू घाटी के पहाड़ मिट्टी में हो रहे तब्दील

टीम एबीएन, रामगढ़/ रांची। जोशीमठ में जो हालात हैं उसे देखकर सभी की रूंह कांप उठी है। वहां के रहने वाले लोगों के आशियाने उनसे छीन गए हैं। वहीं, झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में जोशीमठ जैसे हालात पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, जोशीमठ में जो हुआ उसके बाद अब दुनिया भर में पहाड़ों पर किये गये निर्माण की नए सिरे से पड़ताल की जा रही है कि कहीं पहाड़ों की कठोरता और उनके स्वरूप में बदलाव तो नहीं आ रहा। 

ऐसे में पतरातू की पड़ताल जरूरी है क्योंकि पतरातू घाटी के पहाड़ करोड़ों साल पुराने हैं और यह ग्रेनाइट चट्टानों से बने हैं, लेकिन समय के साथ ग्रेनाइट चट्टानों से बने यह पहाड़ मिट्टी में तब्दील होते जा रहे हैं। पतरातू घाटी के चट्टानों को करीब से देखने से ये मिट्टी में तब्दील होते हुए आसानी से दिखेंगे। हाथों से रगड़ने पर भी यह तेजी से गिरने लगते हैं। वहीं, इस सभी को देख पत्थरों को जाली में बांधकर लगा दिया गया है ताकि बारिश के दिनों में चट्टान गिरने की स्थिति में पत्थरों के बने यह बाड़े गिरते चट्टानों को रोक सकें।

पतरातु घाटी के पहाड़ करोड़ों साल पुराने हैं : पर्यावरण एक्सपर्ट नितीश प्रियदर्शी बताते हैं कि ग्रेनाइट चट्टानों से बने पतरातु घाटी के पहाड़ करोड़ों साल पुराने हैं और अब समय के साथ चट्टानों का अपरदन भी तेजी पर है। लिहाजा समय रहते इन पहाड़ों को बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पतरातू घाटी के नीचे नलकारी नदी के पास भूस्खलन के प्रमाण भी मिलते हैं। 

पर्यावरणविद नितीश प्रियदर्शी की कहना है कि सिर्फ पतरातू घाटी ही नहीं बल्कि रांची का पहाड़ी मंदिर और आसपास जितनी भी पहाड़ियां हैं, उनपर निर्माण और मानव हस्तक्षेप बंद होना चाहिए, नहीं तो यह पहाड़ कभी भी बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।

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