टीम एबीएन, रांची। स्वामी विवेकानंद ने सौ साल पूर्व जो बातें कही थी आज वे सही साबित हो रही है। चरित्र और कर्म को स्वामी जी ने सबसे महत्वपूर्ण मानते हुए पूरे विश्व को महत्वपूर्ण संदेश दिये।
गुरुवार को उर्सुलाइन इंटर कॉलेज रांची के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में खबर मन्त्र के वरिष्ठ उप संपादक एनके मुरलीधर ने कहा कि आज के युवा जिस प्रकार विभिन्न समस्याओं से जुझ रहें हैं उसका सबसे बड़ा कारण आत्मबल की कमी है। असफलता कभी सिद्ध नहीं करती कि आप आगे सफल नहीं हो सकते। जब भारत गुलाम था गरीबी के जाल में जकड़ा था तब कैसी स्थिति रही होगी। तब स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को कहा कि आपकी मां आपकी धरती मां है और आप उनके लिये भी कुछ सत्कर्म करें।
पूरे विश्व के इतिहास में पहली बार हुए विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी जी बड़ी कठिनाई से पहुंचे और तमाम कठिनाई के बीच जब कार्यक्रम में उन्हें अपने धर्म, देश और संस्कृति के बारे में बोलने का अवसर मिला तो उन्होंने अपने कुशल वक्तव्य से पूरे विश्व को भारत के महत्व और भारतीय संस्कृति के उच्च बोध को स्थापित किया। स्वामी जी ने देश में ऐसा मनोबल बढ़ाया कि आजादी की लड़ाई में यह बल सकरात्मक ताकत बनी।
श्री मुरलीधर ने कहा कि आज युवाओं के लिये निराशा और आत्महत्या बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में हमें अपने शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने के साथ ही हमें अपनी जीवन चरित्र और बल को उपर उठाने के विषय में चिंतन करना चाहिए। स्वामी जी कहते थे कि देह का बढ़ना और बुद्धिमान होना दो बात है। बुद्ध और ईसा मसीह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरक के होते हुए अगर हम निराशा के गर्त में जाते हैं तो इसका कारण हम सब है। हम अपने आस-पास के नकारात्मक तत्वों से प्रेरणा लेते हैं इसलिये हम परेशान होते हैं। हमारी संस्कृति और उसकी मजबूती का प्रतिफल है कि हमें हमारे परिजनों का बड़ा सहयोग मिलता है। पश्चिमी सभ्यता सिर्फ धन की प्रमुखता देते हैं जबकि हमारी संस्कृति मानव मन की प्रसन्न्ता पर ध्यान देती है।
इस अवसर स्वामी जी की लिखी कविताओं का भी पाठ किया गया। स्कूल परिसर में युवा दिवसर के अवसर पर विवेकानंद के भेष में छात्राओं ने उनके संबोधन के मुख्य बिंदुओं को उदघोष कर शपथ लिया कि वे अपने कर्तव्य पथ पर आगे चलती जायेंगे। प्राचार्या डॉ मरेी गे्रस ने स्वामी जी की उक्ति का उदघोष करवा कर वातावरण को ऊजार्वान कर दिया। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्य और चरित्रवान होकर ही जीवन में उचें आदर्श प्राप्त किये जा सकते हैं।