टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र नाथ महताे ने कहा कि इस सत्र में विनियोग विधेयक को छोड़ कर कुल 9 विधेयक सरकार के द्वारा लाये गये, जिसमें से 8 विधेयकों को सभा के द्वारा पारित कर राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि यह सत्र समयावधि के हिसाब से एक छोटा सत्र था। परन्तु विधायी कार्यों की उपयोगिता के लिहाज से यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण था।
यह सत्र गागर में सागर भरने जैसा रहा।कुल 05 कार्य दिवसों में निर्धारित 17 घंटों तक सदन की कार्यवाही चली जो कि निर्धारित अवधि का 100 प्रतिशत से भी अधिक है। स्पीकर शुक्रवार काे शीतकालीन सत्र में समापन भाषण दे रहे थे। उन्हाेंने कहा कि इस सत्र में सदस्यों का कुल 326 प्रश्न प्राप्त हुआ। जिसमें से 230 प्रश्न स्वीकृत किया गया। इनमें से 174 प्रश्न अल्पसूचित हैं एवं 56 प्रश्न तारांकित है। इन 230 प्रश्नों में से 192 प्रश्नों का उत्तर ऑन-लाईन प्रश्नोत्तर प्रणाली से प्राप्त हुआ। इस प्रकार ऑन-लाईन प्रश्नोत्तर प्रणाली के माध्यम से उत्तर प्राप्ति का प्रतिशत 83.48 प्रतिशत रहा। यह उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि यह प्रतिशत पिछले मानसून सत्र के दौरान 88.44 प्रतिशत था। उन्हाेंने कहा कि विभागों को ऑन-लाईन प्रश्नोत्तर प्रणाली के प्रति ज्यादा सजग रहने की आवश्यकता है ताकि इस अच्छे कार्य प्रणाली को हम और अधिक आगे ले जा सकें। इस सत्र के दौरान 20 स्वीकृत ध्यानाकर्षण की सूचनाओं में 07 ध्यानाकर्षण की सूचना उत्तरित हुए तथा 13 लम्बित ध्यानाकर्षण सूचनाओं को प्रश्नः एवं ध्यानाकर्षण समिति को सुपुर्द जाता है। 27 निवेदन स्वीकृत हुए। कुल 117. शून्यकाल की सूचनाएं प्राप्त हुए, जिनमें से 100 शून्यकाल की सूचनाएं स्वीकृत किये गये।
सत्र के दौरान अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति, सरकारी आश्वासन समिति, प्रत्यायुक्त विधान समिति एवं सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति द्वारा प्रतिवेदन सभा पटल पर रखा गया। सत्र के प्रारंभिक दिनों को छोड़ दिया जाये तो यह सत्र बड़े ही सकारात्मक रूप से सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के सहयोग से चला है। लोकतंत्र के इस मंदिर में वाद-विवाद के माध्यम से ही जन समस्याओं के समाधान संभव है। परन्तु विवाद की ऊष्मा में जन-कल्याण के उद्देश्य खत्म न हो जाये इसका ध्यान हम सब को रखना है।