- जामताड़ा में आपस में भिड़े कांग्रेसी
- राजेश ठाकुर के साथ भी धक्का-मुक्की
- कांग्रेस का अंतर्कलह चरम पर
- नये प्रदेश अध्यक्ष के लिए किसी आदिवासी चेहरे की तलाश
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कांग्रेस की तहजीब बिल्कुल स्कूली बच्चों जैसी हो गयी है। बात-बात पर झगड़ना और खेमेबाजी करना कांग्रेसियों की नियति बन गयी है। हाल ही में, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर को जामताड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान भारी फजीहत हुई। निलंबित विधायक इरफान अंसारी के समर्थकों ने श्री ठाकुर के खिलाफ नारेबाजी और धक्का-मुक्की की गयी। यह भारत जोड़ो यात्रा के नाम पर कांग्रेस तोड़ो कार्यक्रम का मुजाहिरा किया गया।
गौरतलब है कि यहां कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये। दिलचस्प है कि ये घटना पार्टी की अनुशासन समिति की बैठक के एक दिन बाद ही हुई। बैठक में शीर्ष नेताओं ने कहा था कि अनुशासनहीनता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इसके पूर्व झारखंड कांग्रेस की प्रदेश कमेटी, कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की कमेटी का विरोध शुरू हो गया है। इस पर पार्टी ने विरोध करने वालों को चेतावनी दे दी है कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष ब्रजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि संगठन में अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। झारखंड प्रदेश अनुशासन समिति की पूरे प्रदेश के सभी जिलों में कड़ी नजर है। लेकिन, अनुशासन समिति की चेतावनी को दरकिनार करते हुये कई जिलों में भगदड़ की स्थिति है। पार्टी नेता एक-दूसरे से गुत्थमगुत्था हो रहे हैं।
इसी प्रकार, कुछ माह पूर्व कांग्रेस के एक विधायक अनुप सिंह ने अपने तीन साथी विधायकाकें के खिलाफ अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी। श्री सिंह ने अपनी प्राथमिकी में कहा कि राज्य में आॅपरेशन लोटस के तहत उन्हें खरीदने की कोशिश हुई और इसमें कांग्रेस के इरफान अंसारी समेत तीन विधायक शामिल थे। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इसके पहले ही कोलकाता में कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, नमक विक्सल कोंगाडी व राजेश कच्छप को लगभग 50 लाख रूपये कैश के साथ पुलिस ने पकड़ा था। इस कैश कांड को हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों से जुड़ा बताया गया है।
खबरों के बीच अब कुछ विधायकों द्वारा पार्टी को तोड़कर अलग गुट बनाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी को तोडे की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और नये गुट के नाम पर सहमति भी बन गई थी। लेकिन अंतिम समय में दो आदिवासी विधायकों ने मुंह मोड़ लिया। बिरसा कांग्रेस के नाम से अलग गुट बनाकर तख्तापलट करने का पूरा स्क्रिप्ट लिखा जा रहा था। लेकिन, गुट के नेता के नाम पर कुछ विधायक बिदक गये।
स्पष्ट रूप से कहा गया कि जो वर्तमान सरकार में मंत्री वही अगली व्यवस्था में भी नेतृत्व करेंगे तो फिर ऐसे बदलाव का क्या मतलब। इसके बाद कुनबा बिखर गया और कांग्रेस टूटने से बच गई। इसके बाद पार्टी विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने स्पीकर कोर्ट में अपने ही तीन विधायकों इरफान अंसारी, नमन विक्सल कोंगाडी व राजेश कच्छप की विधायकी रद्द करने का आवेदन दे दिया है। इस प्रकरण को लेकर स्पीकर कोर्ट में सुनवाई जारी है।
हालांकि, इसके पहले भी एक बार विधायक अनुप सिंह ने भाजपा के आॅपरेशन लोटस को लेकर एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले की जांच-पड़ताल अभी चल ही रही है। सूत्रों की मानें तो इसके बाद पर्टी के एक बड़बोले विधायक ने तो नेतृत्व कतार्ओं पर ही सवाल उठा दिया। भरी बैठक में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खरी-खरी सुनाई थी।
कांग्रेस के नाराज विधायकों की योजना सरकार में शामिल रहने की थी। साथ ही, सत्ताधारी झामुमो के साथ-साथ विपक्षी पार्टी भाजपा से भी संपर्क में रहने का निर्णय लिया गया था। राजेश ठाकुर की जगह आदिवासी चेहरे की तलाशप्रदेश कांग्रेस में आने वाले दिनों में फेरबदल हो सकता है। पार्टी को आदिवासी चेहरे की तलाश है़। प्रदेश में पार्टी की कमान किसी आदिवासी नेता को मिल सकती है। इसके बाद झारखंड कांग्रेस की राजनीति बदल सकती है। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2024 के लोकसभा व विधानसभा चुनाव पर भी अंतर्कलह का असर पड़ सकता है।
कांग्रेस की प्रदेश इकाई में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू, सुखदेव भगत, वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव के अलावा प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का गुट समानांतर चल रहा है। इसके कारण पार्टी कार्यकर्ताआें में भ्रम व उहापोह की स्थिति बनी हुई है।