- पंजीयन शुल्क वापस लौटाये या उसी पंजीयन संख्या से ही मुफ्त आवेदन की सुविधा दे सरकार
टीम एबीएन, हजारीबाग। नव झारखंड फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोरी राणा ने कहा झारखंड नियोजन नीति पूरे तरीके से त्रुटिपूर्ण थी जिसके कारण हाईकोर्ट ने इस आधार पर लिए जाने वाले सारे परीक्षाओं को रद्द कर दिया। सबसे पहले तो सरकार सभी आवेदकों से वसूला गया पंजीयन शुल्क उन्हें वापस लौट आने की व्यवस्था करे अथवा उसी पंजीयन संख्या से ही मुफ्त आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध कराये। नई नियोजन नीति में झारखंड के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ झारखंड के प्रवासी मजदूरों के बच्चों का भी रखा जाए ताकि उनका भविष्य सुधर पाए। झारखंड राज्य में चयन प्रक्रिया के दौरान बड़ी धांधली होने की आशंका रहती है।
नियमावली के साथ चयन प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाकर प्रतिस्पर्धा का समान अवसर सभी को उपलब्ध कराया जाए। खैर झारखंड में स्थानीय नीति आने के बाद स्थानीय के लिए सुदृढ़ अवसर रहेगा। श्री राणा ने ये भी कहा कि झारखंड जैसे संसाधन परिपूर्ण राज्य में छात्रों की पढ़ाई हेतु संपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराना सरकार का नैतिक कर्त्तव्य है। शिक्षित युवा शिक्षित समाज का निर्माण करता है और युवाओं के शिक्षा में बाधक बन कर सरकार अपने ही समाज के विकास में अवरोधक का काम कर रही है।
चुनावी दौर में बड़े-बड़े वादा तो होता है लेकिन चुनाव के बाद वादा और इरादा दोनों बदल जाता है। सरकार के ऐसे दोहरी मानसिकता कारण ही झारखंड गर्त में गिर चुका है। कभी किसानों के साथ अन्याय होता है कभी शहीदों के साथ तो कभी छात्रों के साथ तो कैसे बनेगा हमारा सोना झारखंड?