टीम एबीएन, चरही। चरही क्षेत्र के एकलौता सरकारी उप स्वास्थ्य केंद्र के कई क्वार्टर लगभग तीन-चार दशकों से जर्जर अवस्था में पड़ा हुआ है। जिसे सुध लेने वाला कोई नहीं है। कई ऐसे भी क्वार्टर हैं जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इस स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर औऱ पांच एएनएम कार्यरत हैं। इन लोगों को रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
केंद्र में आवास नहीं रहने के कारण अपने घर रामगढ़, रांची और हजारीबाग से किराये के वाहन से आना-जाना करते हैं।म, जो काफी कठिनाइयों का सामना प्रतिदिन करना पड़ रहा है। एक समय में यह उप स्वास्थ्य केंद्र इलाज के मामले में काफी चर्चित रहा है। डॉक्टर से लेकर नर्स तक चरही केंद्र में दिन-रात केंद्र में रहकर मरीजों के इलाज में तत्त्पर रहा करते थे। मरीजों का इलाज भी समय पर होता था। एक नर्स अंजू कुमारी जर्जर क्वार्टर मे रहकर पूरे अस्पताल को देख रही है। रात में किसी प्रसूत महिला पहुंचती है, तो इलाज करने में और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर डॉक्टरों और नर्सों के लिए आवास का निर्माण हो जाय तो महिला-पुरूष या फिर दुघर्टनाग्रस्त लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावे कई संसाधनों की कमी है। इसके बावजूद भी अस्पताल को चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। ताकि ग्रामीणों को इस अस्पताल में बेहतर से बेहतर इलाज करा सके। अपना इलाज और कहीं जाकर नहीं करना पड़े।
इतना ही नहीं इस स्वास्थ केंद्र में एक एम्बुलेंस की आवश्यकता है। ताकि गंभीर मरीजों को अन्य अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया जा सके। यहां पर वाहन नहीं रहने के कारण कार्यरत डॉक्टर और नर्स दूर दराज के गांव लोगों के इलाज के लिए सही समय नहीं पहुंच पाते हैं। जिस कारण ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामान करना पड़ता है। चरही के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मांग किया कि केंद्र जर्जर भवन का निर्माण कराते हुए संसाधन युक्त केंद्र बनाया जाय। ताकि ग्रामीणों को सही इलाज हो सके।