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आदिवासी संस्कृति को जानने वियतनाम से चरही पहुंचीं मेरी और सिसिलिया

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आदिवासी संस्कृति को जानने वियतनाम से चरही पहुंचीं मेरी और सिसिलिया
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टीम एबीएन, चरही (हजारीबाग)। वियतनाम से झारखंड के चरही आई मेरी और सिसिलिया का एक सप्ताह का झारखंड दौरा है। पहले दिन चुरचू प्रखंड के कसियाडीह और हजारीबाग कोयला क्षेत्र के उल्हारा, परेज, तापीन, दुरूकसमार आदि क्षेत्रों का दौरा किया। सर्वप्रथम आदिवासी संथाली बहुल गांव कसियाडीह पहुंच वहां के रहन सहन व आदिवासी संस्कृति को जाना। आदिवासियों की सादगी रहन सहन व उनकी संस्कृति को जानकर काफी प्रभावित हुई। तत्पश्चात सीसीएल का माइनिंग एरिया परेज, उल्हारा, दुरुकसमार, तापीन और लोपोंगटंडी गांव पहुंचकर विस्थापितों व प्रभावितों की समस्याओं से अवगत हुई। माइनिंग क्षेत्रों में विस्थापित व प्रभावितों के समस्याओं की जानकारी ली।  
चिंता जाहिर करते हुए मेरी और सिसिलिया ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन व केंद्र सरकार को विस्थापितों  के पुनर्वास के साथ-साथ  पेयजल की समस्या और स्वस्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मौके पर झारखंड आदिवासी दलित मंच के संयोजक महालाल हंसदा, फिलेन होरो, कलिस्ता सोरेन, चुनुलाल हंसदा, ताहाराम हेम्ब्रोम, बिनीता टुडू सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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