टीम एबीएन, बरही। झारखंड प्रदेश के विभिन्न प्रखंडों में खेलो झारखंड कार्यक्रम के तहत प्रखंड स्तर पर विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित कराया जा रहा है। इसी के तहत प्रखंड मैदान में प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों से बच्चे भाग लेने के लिए बच्चों को विद्यालय के शिक्षकों द्वारा लाया जा रहा है। जहां एक ऐसा नजारा दिखा। जिसने सबको अचंभित एवं चिंतित कर दिया।
खेल समाप्त होने के बाद दौड़े दौड़े राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय कदवा के बच्चे घर जाने के लिए अपने आॅटो में आयें। देखते ही देखते एकाएक लगभग 29 बच्चे आॅटो में सवार हो गये। आॅटो का चालक व्यवस्थित रूप से किसी वस्तु की तरह बच्चो को ठूसकर बैठाया।
उक्त बात की जानकारी लेने के लिए विद्यालय के उपस्थित शिक्षक से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा पैसा नहीं दिया जाता है, मात्र 500 ही मिलता है। उसमे कितना से गाड़ी करे, इसलिए इसी तरह उन्हें लाए है। पूछे जाने पर की इस तरह से अगर बच्चो के साथ कोई अनहोनी घटना घटती है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा तो शिक्षक ने कहा कि मुझे क्या पता? मैं नहीं जानता, विभाग एवं प्राचार्य समझेंगे।
उक्त घटना के बाद विचारणीय है कि क्या सरकार का यह कार्यक्रम बच्चो की प्रतिभा को निखारने की योजना है? या फिर इस योजना की आड़ में अधिकारियों से कोई दबाव? या फिर उन्हें सुरक्षितरूप से उनके अभिभावकों को सुपुर्द करना भी है। ये एक चिंताजनक विषय बनता जा रहा है।