टीम एबीएन, गुमला। गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज में 24 नवंबर को डॉ प्रसेन्नजीत मुखर्जी ने बाटनी हेड आॅफ डिपार्टमेंट के रूप में योगदान किया। वह गुरुवार को कॉलेज प्रिंसिपल प्रो अमरजीत खलखो को के समक्ष अपना योगदान किया।
डॉ प्रसनजीत मुखर्जी झारखंड के दूसरे ऐसे शख्स हैं। जो बाटनी में डॉक्टर आॅफ साइंस (डीएसई) की उपाधि हासिल की है। इसके पहले डॉ केके नाग ने इस उपलब्धि को हासिल किया था।
डॉक्टर मुखर्जी को लंबा शैक्षणिक अनुभव है। वह करीब 30 सालों से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसके पहले वह संथालपरगना के पाकुड़ स्थित केकेएम कॉलेज में वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष थे। म्यूच्यूअल ट्रांसफर के तहत वह रांची विश्वविद्यालय के अधीनस्थ केओ कॉलेज गुमला में पदस्थापित किये गये हैं।
झारखंड के वह नामचीन पर्यावरणविद है। इनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें विश्वविद्यालयों में चलते हैं। इनके अधीनस्थ (निर्देशन) कई विद्यार्थियों ने पीएचडी की उपाधि हासिल की है। इनके केओ कॉलेज गुमला में योगदान करने से क्षेत्र के वनस्पति शास्त्र के विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। डॉ मुखर्जी प्लांट टैक्सनॉमी के विशेषज्ञ भी है।
उनके कार्तिक उरांव कॉलेज में योगदान करने पर सांसद सुदर्शन भगत, कॉलेज के रसायन विभागाध्यक्ष जतरु तिर्की, पद्मश्री अशोक भगत, डॉ अरुण उरांव, प्रशासनिक अधिकारी अरविंद कुमार लाल, ब्रज किशोर अग्रवाल, गीता मिश्रा, कुणाल कुमार, डॉ दिनेश उरांव, निरंजन सिंह आदि बधाई दी।