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झारखंड : जानें प्राकृतिक नेमत से नवाजे गये प्रदेश ‘बुशलैंड’ की रोचक बातें

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झारखंड : जानें प्राकृतिक नेमत से नवाजे गये प्रदेश ‘बुशलैंड’ की रोचक बातें
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टीम एबीएन, रांची। झारखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर 22 साल के सफर पर नजर डालना दिलचस्प है। दरअसल, झारखंड की स्थापना को 22 साल हो चुके हैं। 14 नवंबर की आधी रात यानी 15 नवंबर को स्थापना दिवस के मौके पर जानिए 22 उल्लेखनीय उपलब्धियां। बिहार से अलग होने के बाद झारखंड प्रदेश ने अलग और विशिष्ट पहचान कायम की है। झारखंड फाउंडेशन डे एक अवसर है जब एक बार फिर इस युवा प्रदेश की विशेषताओं पर एक नजर डाली जाए और इस अद्भुत प्रदेश से थोड़े बेहतर तरीके से वाकिफ होने का प्रयास किया जाये। अंग्रेजों की हुकूमत से आजादी के बाद 1947 में मध्यप्रदेश, ओड़िशा और बिहार आजाद भारत के नये राज्य बने। कई दशकों के बाद साल 2000 में बिहार विभाजन हुआ और राज्य के कुछ हिस्से अलग राज्य झारखंड का हिस्सा बन गए। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते झारखंड का गठन हुआ। 
22 साल में 6 सीएम, तीन बार राष्ट्रपति शासन 
आमतौर पर किसी भी प्रदेश का जिक्र आते ही वहां की सरकारों का नाम सबसे पहले लिया जाता है। सियासत के चश्मे से देखने पर पता लगता है कि झारखंड गत 22 साल में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थितरता झेलता रहा है। प्रदेश को पहला मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के रूप में मिला। फिलहाल हेमंत सोरेन सीएम हैं। 22 साल में 6 मुख्यमंत्री और 3 बार राष्ट्रपति शासन का साक्षी रहा झारखंड आदिवासी अस्मिता की मशाल लिए सधे हुए तरीके से निरंतर आगे बढ़ रहा है। 
जलप्रपातों का शहर के नाम से प्रसिद्ध 
झारखंड की राजधानी सिटी और फॉल्स बिहार के अलावा झारखंड की सीमाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से लगती हैं। झारखंड की राजधानी को सिटी आफ फॉल्स यानी जलप्रपातों का शहर भी कहा जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे हुंडरू, दशम, जोन्हा, सीता और पंचघाघ जलप्रपात पर्यटकों को बड़ी संख्या में आकर्षित करते हैं। झारखंड में प्रचूर खनिज पूरे भारत का लगभग 40 फीसद खनिज झारखंड के भूभाग में है। प्रचूर खनिज संपदा वाले इस प्रदेश में परमाणु ऊर्जा के लिए जरूरी यूरेनियम का भी बड़ा भंडार है।  

भारत का करीब 32 फीसद कोयला और देशभर के तांबे का 25 फीसद झारखंड में 
इसके अलावा पूरे भारत का करीब 32 फीसद कोयला और देशभर के तांबे का 25 फीसद झारखंड में है। इन खनिजों के अलावा अभ्रक, बॉक्साइट, ग्रेनाइट और सोना, चांदी जैसे खनिज भी झारखंड के भूगर्भ में मौजूद हैं। 80 फीसद आबादी खेती पर निर्भर खेती के मामले में भी झारखंड प्रदेश उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर रहा है। आमतौर पर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे प्रदेशों में सेब और केसर की खेती होती है, लेकिन यहां के उद्यमी किसानों ने भी सेब और केसर की खेती शुरू कर दी है। अमरूद, केला, पपीता और नींबू जैसे प्रमुख फलों के अलावा अब पूर्वी सिंहभूम के किसान काजू की खेती भी कर रहे हैं। प्रदेश की 80 फीसद आबादी खेती पर निर्भर है और चावल यहां की प्रमुख फसल है। 

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