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नमाज के लिए आवंटित कमरे को सबके लिए खोल दिया जाये : केएन त्रिपाठी

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नमाज के लिए आवंटित कमरे को सबके लिए खोल दिया जाये : केएन त्रिपाठी
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रांची। मंगलवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री व इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष केएन त्रिपाठी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि झारखंड सरकार के विधानसभा स्पीकर ने गलत नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमें नमाज पढ़ने के लिए एक अलग कमरा आवंटित किया गया है। उनको नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए था कि सभी धर्मों के लिए, अध्यात्म के लिए एक कमरा आवंटित किया जाता है। झारखंड राज्य में दुर्भाग्य की बात है कि यहां की राजनीतिक संस्कृति खराब हो गयी है। पिछले 20 वर्षों से यह देखता आ रहा हूं कि जब से झारखंड अलग राज्य बना है तब से चार दिन का विधानसभा सत्र बुला लिया जाता है। इन चार दिनों में विधायक विधानसभा को नाच गाना करके रामलीला मैदान बना देते हैं। यह बहुत ही आपत्तिजनक है। राज्य की जनता माननीय विधायकों के पास समस्या लेकर जाती है। कई शिक्षकों की समस्या, पुलिस की समस्या, पुल की समस्या, बिजली की समस्या अकारण राज्य की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। राज्य की जनता सोचती है कि उनकी समस्याओं/बातों को सरकार के सामने उठाएंगे और उसका समाधान होगा। सरकार को कम से कम एक महीने का सत्र रखना चाहिए। राजनीतिक कल्चर के चलते प्रजातंत्र खराब हो गया है। मौका क्या मिला कि भाजपा ने विधानसभा को नाच गाना का मंडप बना दिया। विधानसभा को हर बार चार दिन के सत्र में डुग्गी ड्रामा करके सत्र को भंग कर दिया जायेगा। विपक्ष भी नहीं चाहेगी कि जनता के प्रश्न को उठाएं और सरकार भी नहीं चाहेगी कि हम प्रश्नों का जवाब दें, तो फिर जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। सोमवार को मैं विधानसभा गया तो वहां की परिस्थितियों को देखा। नाच गाना हो रहा था। मामले को घंटा दो घंटा विरोध करके राज्य के संज्ञान में लाया जा सकता है। विरोध के बाद पूरे सत्र चार दिन भी नहीं चले तो फिर क्या होगा? अगर एक साल में चार दिन भी जनता की समस्याओं को नहीं उठा सकते तो इस विधानसभा का मतलब क्या है? जब विधायकों को उनके विचार पांच साल के लिए ही नहीं जाते, वो विचार देते ही नहीं हैं तो फिर उन विचारों पर समाधान कैसे होगा? जरुरत ही क्या है इस विधानसभा का? इस चुनाव, विधायकों का खर्चा, अरबों रुपए खर्च किए जाने का क्या मतलब है? हमें लगता है कि राज्य का सिस्टम (राजनीतिक कल्चर/संस्कृति) को दुरुस्त करने की जरूरत है। मैं विधानसभा स्पीकर से मांग करता हूं कि नोटिफिकेशन को संशोधित कर वह जो कमरा आवंटित किया गया है उस कमरे को हर व्यक्ति के लिए खोला जाए क्योंकि सरकारी संपत्ति/सरकारी भवनों का उपयोग सबके लिए समान रूप से किया जाना चाहिए और मैं भाजपा से मांग करता हूं कि कम से कम अगले दो दिन 08 और 09 सितंबर को जनता के हित में सवालों को पूछें।
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