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चरणबद्ध आंदोलन का आगाज : कल भी काला बिल्ला लगाकर प्रदेश के शिक्षक करेंगे विरोध

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चरणबद्ध आंदोलन का आगाज : कल भी काला बिल्ला लगाकर प्रदेश के शिक्षक करेंगे विरोध
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टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेश कार्यसमिति के आह्वान पर राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालय के शिक्षकों का चरणबद्ध आंदोलन 4 नवंबर से शुरू हुआ। अपने हक, अधिकार और अस्मिता की रक्षा एवं चार सूत्री लंबित मांगों को लेकर आंदोलन के प्रथम दिन शिक्षकों ने काला बिल्ला लगाकर सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। शिक्षकों का शोषण बंद करने और मांगें पूरी करने की मांग की। संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर और मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक अपने हक, अधिकार, अस्मिता की रक्षा के लिए मजबूर होकर पुन: सड़क पर उतरे हैं। कभी जाति प्रमाण पत्र बनवाने, कभी खाता खुलवाने, शिशु गणना, बीएलओ कार्य, पीटीएम स्वच्छता पखवाड़ा, खेल प्रतियोगिता, रिपोर्टिंग का दबाव दिया जाता है। अब यह देखा जा रहा है कि घंटी लग रही है या नहीं और लेशन प्लान से पढ़ाई हो रही है कि नहीं। संघ ने कहा कि जब वेतन वृद्धि की बात आती है, तब पे कमीशन द्वारा निर्धारित एंट्री भी शिक्षकों को नहीं दिया जाता है। सरकार सचिवालय कर्मियों को दे देती है। शिक्षकों को बेकार और निरीह समझ लेती है। सभी कर्मियों को सेवा काल में तीन अनिवार्य वित्तीय लाभ यानी एमएसीपी देते हुए प्रमोशन देती है। टीचर्स को छोड़ देती है। यह भेदभाव की नीति है। संघ ने कहा कि शिक्षक घर-परिवार से दूर बीहड़ों में जाकर बच्?चों को पढ़ा रहे हैं। सरकार ट्रांसफर के नाम पर जोन-जोन खेल रही है। कमेटी बनाती है। कमेटी की अनुशंसा अलमारी में बंद कर देती है। शिक्षक राष्ट्र और समाज का भाग्य बदलने के साथ सरकार भी पलट देते हैं। शिक्षकों के त्याग और धैर्य को सरकार कमजोरी समझ रही है। संघ ने कहा शिक्षक एकजुट हैं। कल भी काला फीता लगाकर सरकार की दमन का करारा जवाब देंगे। इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 19 नवंबर को सीएम आवास का घेराव किया जायेगा। उसमें शिक्षकों का जनसैलाब राजधानी रांची की सड़को में उमड़ेगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो 17 दिसंबर से अनिश्चितकालीन अनशन आंदोलन पर शिक्षक चले जायेंगे। संघ के नेताओं ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षकों की अस्मिता वर्तमान समय में खतरे में है। अधिकारियों के शोषण, हिटलरशाही, पक्षपात और उपेक्षाओ से तंग आकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन में असदुल्लाह, दीपक दत्ता, अनूप केशरी, अनिल कुमार सिंह, राकेश कुमार, अजय ज्ञानी, उपेंद्र कुमार, श्रीकांत सिन्हा, संजय साहु, हरेकृष्ण चौधरी, बाल्मिकी कुमार,  प्रभात कुमार, अवधेश कुमार, अजय कुमार, अनिल खलखो, कृष्णा शर्मा, नंदकिशोर यादव, संजय कुमार, सलीम सहाय, रामचंद्र खरवार में शामिल हैं। इसके अलावा सुरंजन कुमार, मानी उरांव, संजय कंडुलना, संजय कुमार, सच्चिनानद सिंह, रमेश प्रसाद, अशोक राज, विभूति महतो, राजू साहू, राजेश सिन्हा, प्रवीण कुमार, संजय सिंह, सुधीर दुबे, अमरेश चौरसिया, सुनील दुबे, दिलीप श्रीवास्तव, अजय कुमार अमोल, नीरज द्व?िवेदी, गोवर्धन यादव, रवीकांत रवि, विनोद राम, विनोद चौधरी, महेश्वर घोष, हरीश कुमार, जुवेल हांसदा, पवन ठाकुर, आनंद रजक, राधेकांत आदि भी हिस्सा ले रहे हैं। ये है चरणबद्ध आंदोलन : 4 और 5 नवंबर को काला बिल्ला लगाना, 7 से 12 नवंबर को जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपना, 19 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव, 17 दिसंबर से राजभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन अनशन। ये हैं मांगें : बिहार की तर्ज पर झारखंड के शिक्षकों को टअउढ का लाभ दिया जाय। छठे वेतन आयोग की विसंगतियों का निराकरण करते हुए इंट्री पे 16,290 किया जाय। इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर नियमों का सरलीकरण करते हुए एक बार गृह जिला स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की जाय। गैर शैक्षणिक कार्यों एवं रिपोर्टिंग के अत्यधिक दवाब से शिक्षकों को पूर्णत: मुक्त किया जाये।
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