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हजारीबाग : सदर विधायक की तत्परता ने बचायी जच्चे बच्चे की जान

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हजारीबाग : सदर विधायक की तत्परता ने बचायी जच्चे बच्चे की जान
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टीम एबीएन, हजारीबाग। हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन और यहां के चिकित्सकों की मनमानी कार्यशैली और रवैए से यहां इलाज कराने आने वाले गरीब-गुरबा मरीज और उनके परिजन परेशान हैं। स्वास्थ्य पेशे से जुड़े अधिकारियों और चिकित्सकों को धरती के भगवान का दर्जा दिया गया है लेकिन इनकी संवेदना मरती जा रही है और इनमें स्थानीय प्रशासन और सरकार का कोई भय भी नहीं दिखतत है तभी तो एचएमसीएच में बुधवार को स्वास्थ विभाग के अपर मुख्य सचिव अरूण कुमार सिंह के होने वाले दौरे के दो दिन पूर्व रविवार की शाम को एक मामला प्रकाश में आया जिसमें लेबर रूम जैसे संवेदनशील जगह पर एक गर्भवती महिला खिरगांव निवासी सोनू कुमार रजक की पत्नी खुशबू कुमारी को तत्काल सीजेरियन की सलाह के बाद ओटी में शिफ्ट किया गया लेकिन एनेस्थेसिस्ट के नहीं आने पर इसी हालत में छोड़कर महिला चिकित्सक अस्पताल से वापस अपने घर चली जाती है और यह कह जाती है कि आप कहीं और ले जाकर सिजेरियन करवा लीजिये। लगातर घंटों तक परिजन के लाख प्रयासों के बाद भी चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचते हैं और जाम में फंसने एवं पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने का बहाना बनाकर टालमटोल कर देते हैं। जब मरीज के परिजन सदर विधायक मनीष जायसवाल से गुहार लगाते हैं तो विधायक मनीष जायसवाल अपने संध्या अर्घ्य के दौरान हुडहुडू छठ घाट के निरीक्षण कार्यक्रम को स्थगित कर जच्चे- बच्चे की जान बचाने को सीधे अस्पताल के लिए कूद पड़ते हैं। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों को विधायक मनीष जायसवाल के द्वारा कड़ी फटकार लगाए जाने के बाद आनन-फानन में चिकित्सक अस्पताल पहुंचते हैं और फिर दर्द से कर्राह रही इस गर्भवति महिला को ओटी में सिजेरियन के लिए शिफ्ट किया जाता है। सिजेरियन सफल होने तक विधायक मनीष जायसवाल लेबर रूम ओटी के बाहर परिजनों के साथ डटे रहते हैं। जैसे ही सिजेरियन सफल होता है बच्चे को लेकर उसकी दादी फफक- फफक कर रो पड़ती है और पूरा परिवार विधायक मनीष जायसवाल को धन्यवाद और साधुवाद देने लगता है। मरीज के परिजन जच्चे बच्चे को सुरक्षित पाकर विधायक मनीष जायसवाल का खुशी के छलकते आंसू के साथ कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और अस्पताल प्रबंधन की अनदेखी, चिकित्सकों की मनमानी और वर्तमान सरकार के जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मुखर होते हैं और कहते हैं की हमारे लिए विधायक मनीष जायसवाल रहनुमा बनकर समय पर मदद के लिए अस्पताल पहुंचे अन्यथा हमारे मरीज के साथ कुछ भी हो सकता था। इसी दौरान एक ओर मरीज गदोखर निवासी रहती हैं जिनका शिशु पेट में ही मर जाता है और दिन 12 बजे से इंतेजार करने के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं देखते हैं। इनका भी सीजेरियन यहां विधायक मनीष जायसवाल के प्रयास से होता है और मृत शिशु को सुरक्षित निकालकर मां की जान बचाई जाती है। विधायक मनीष जायसवाल के साथ उनके मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी भी अस्पताल में मौजूद रहें। मौके पर विधायक मनीष जायसवाल ने अस्पताल की कुव्यवस्था पर भारी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इससे अच्छा तो सदर अस्पताल था जहां ऐसी कुव्यस्था नहीं थी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल तब्दील होने के बाद आधारभूत संरचना के साथ मानव संसाधन में भी वृद्धि हुई। लेकिन वर्तमान समय में डॉक्टर असमय अपनी ड्यूटी नहीं करते हैं। अधिकतर डॉक्टर अपने ड्यूटी समय में आउट आॅफ स्टेशन रहते हैं या ड्यूटी में मनमानी करते हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रबंधन को मरीज के हित के कार्य से कोई लेना देना नहीं है। अस्पताल प्रबंधन इतना लापरवाह है कि डॉक्टर का ड्यूटी रोस्टर तक वार्ड में डिस्प्ले नहीं करता है और ना ही वार्ड में ड्यूटी कर रहे स्वस्थ कर्मियों को ड्यूटी रोस्टर की जानकारी होती है। ऐसे में आपातकालीन मरीज इस अस्पताल में भगवान भरोसे ही हो जाते हैं। विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि वर्तमान सरकार के कान में घंटी बजाने पड़ेगी तब उनकी कुंभकरनी निद्रा से आंखें खुलेगी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जुड़े पूरे सिस्टम को या अच्छे से एहसास हो गया है कि सरकार और प्रशासन से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार जनहित और मरीजों के हित में कोई कार्य करना नहीं चाहती। विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी इस समस्या को पुरजोर तरीके से हम उठाएंगे और उचित मंच तक जरूर लेकर जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सचिव से मिलकर भी उन्हें घटना की पूरी जानकारी वे देंगे। उल्लेखनीय है की स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार सिंह के दौरे को लेकर अस्पताल प्रबंधन पिछले एक सप्ताह से निरंतर अस्पताल के बाह्य साज- सज्जा, वॉल पेंटिंग और सफाई में करवा रहा है और लाखों खर्च किया जा रहें है लेकिन जरूरतमंद मरीजों के लिए जो सबसे जरूरी व्यवस्था है चिकित्सीय व्यवस्था उस पर पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। अब देखना है की हर बार की तरह स्वास्थ्य सचिव जैसे प्रमुख का एचएमसीएच दौरा मरीजों के हित में सार्थक होता है या प्रबंधन की दिखावा व आइवास ही उन्हें पसंद आता है। बहरहाल जो भी हो लेकिन एचएमसीएच की गिरती स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रबंधकीय लापरवाही, चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की मनमानी इन दिनों सरकार और प्रशासन के अनदेखी के कारण चरम पर है।
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