टीम एबीएन, हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार में रोज नये आयाम जोड़े जा रहे हैं और इस सम्बंध में राजभवन की चुप्पी राजभवन सचिवालय की मौन सहमति विश्वविद्यालय की अनियमितता और भ्रष्टाचार पर दशार्ती है उक्त बातें चंदन सिंह ने पत्र के माध्यम से राज्यपाल को बताया।
चंदन सिंह ने लिखा कि कुलपति कोटे, अवैध बहाली, वित्तीय अनियमितता और अब अवैधानिक कार्य के लिए विनोबा भावे विश्वविद्यालय जाना जा रहा है। ज्ञात हो कि कुलपति के द्वारा सीनेट सदस्यों को नामित किया गया है जिसमें प्राचार्य संत कोलंवा को सदस्य नामित किया गया है जो बिलकुल नियम विरुद्ध है। ज्ञात हो कि प्राचार्य वो जो कमीशन के द्वारा प्राचार्य बनाए गए हैं उन्हें ही 18(10) के तहत सीनेट सदस्य बनाया जा सकता है। वहीं प्रोफेसर कोटा से विश्वविद्यालय के वाणिज्य के एक मात्र शिक्षक मंटून सिंह को इसमें जगह नहीं दिया गया। इस सम्बंध में चंदन सिंह ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से आग्रह किया है की विश्वविद्यालय के सबसे बड़े निकाय जिसके आप अध्यक्ष भी हैं की गरिमा को देखते हुए न्याय संगत कारवाई करें।