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केंद्रीय एजेंसियों में पारदर्शिता और स्वायत्ता का स्तर हुआ कम : हेमन्त सोरेन

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केंद्रीय एजेंसियों में पारदर्शिता और स्वायत्ता का स्तर हुआ कम : हेमन्त सोरेन
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टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश में जिस तरह से केंद्रीय एजेंसियां अब काम कर रही हैं, उससे अब दिखता है कि एजेंसियों में पारदर्शिता और स्वायत्ता का स्तर कम हो गया है। सोरेन ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन एजेंसियों के पीछे कोई शक्ति है जो अपनी चीजों को करवा रही है। चुनाव आयोग ने अभी हिमाचल प्रदेश के लिए चुनाव की घोषणा कर दी पर गुजरात के लिए नहीं। कैलेंडर को फॉलो करने की बजाये इसे आयोग बदलने पर लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रहनेवाले हर नागरिक के हितों की रक्षा सरकार करेगी। अल्पसंख्यक, ओबीसी, एसटी वर्ग सहित सभी वर्गों के लोग निश्चिंत रहें और सभी वर्गों के लोगों के कल्याण के लिए यह सरकार कार्स कर रही है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर किसी के अंदर असुरक्षा की भावना ना रहे और जो अधिकार जिसे मिलना है उसे जरूर मिलेगा।सरकार सभी पहलुओं को देख रही है कि किस आधार पर किसे क्या हक, अधिकार, सम्मान मिले। सबकी भावनाओं का सम्मान रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि पहले अपने काम कराने के लिए विधायक और मंत्रियों का लोग घेराव करते थे लेकिन अब अब सरकार ने 1932 के खतियान सहित आरक्षण के मसले पर जो पहल की है, उसके लिए अब जनता मंत्रियों, सरकार को धन्यवाद दे रही है। सोरेन ने पंचायतों के सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि अगर पंचायतें मजबूत होंगी तो गांव, प्रखंड, जिला और राज्य मजबूत होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी गति आयेगी। गांव, पंचायतों को सशक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि अब जल्दी ही हम पंचायत के जनप्रतिनिधियों संग बैठेंगे और पंचायतों को सबल किया जायेगा। मानकी, मुंडा, परगनैत की भूमिका सुनिश्चित होने के अलावे पंचायती व्यवस्था दुरुस्त होगी। सोरेन ने राज्य में कुड़मी समुदाय के एसटी में शामिल किये जाने के मसले पर कहा कि इस पर राजनीतिक लोग राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं। इसमें कोई खास बात नहीं है। राज्य में 1932 के खतियान को लेकर जो चिंताएं हैं, उससे किसी को निराश नहीं होना है और जो भी इस राज्य में रह रहे हैं, यहां के आदिवासी-मूलवासी हैं, उन्हें ध्यान में रख कर ही सरकार आगे बढ़ेगी। 1932 संवेदनशील मुद्दा रहा है और विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास करते रहे हैं। पूर्व की सरकार में तो इसे लेकर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये लेकिन पर अब जो पहल हुई है, उससे लोग होली की तरह खुशियों के रंग में सरोबार हो रहे हैं। सबों ने इसका स्वागत किया है।
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