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रिम्स का हाल : डाॅक्टर-काउंटर कम, लंबी लाइन से मरीज परेशान

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रिम्स का हाल : डाॅक्टर-काउंटर कम, लंबी लाइन से मरीज परेशान
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टीम एबीएन, रांची। आये दिन कहीं न कहीं सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं। सवाल उठने भी लाजमी है; क्योंकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ ज्यादा होती है और व्यवस्था कम होती है। ऐसा ही मामला झारखंड के रांची जिले से आया है। जहां रिम्स में कार्डियोलॉजी विभाग में ओपीडी की पर्ची को लेकर सुबह से लंबी कतार लगती है। 1 काउंटर होने के कारण ओपीडी के लिए पर्ची धीमी रफ्तार में कटती है। लोगों को इसी 1 काउंटर पर लंबी कतार लगाकर पर्ची कटानी पड़ती है। जानकारी के मुताबिक रिम्स में पर्ची कटाना भी मुश्किल है और डॉक्टर से जांच कराना भी। पर्ची के लिए तो लाइन लगानी पड़ती है, लेकिन डाॅक्टर को दिखाने के लिए भी लंबी लाइन लगानी पड़ती है। डाॅक्टर टेस्ट कराने को बोल दे तो टेस्ट कराने के लिए भी लंबी लाइन लगानी पड़ती है। जांच रिपोर्ट में अगर कोई परेशानी सामने आती है तो डॉक्टर आपको फिर दोबारा दूसरे लैब से उसी जांच को करने की सलाह देते हैं। मरीज यह सब करते थक जाता है। इस दौरान कई बार लाइन में लगने के दौरान हंगामा भी मचाना पड़ता है। यहां जांच रिपोर्ट दिखाने के बाद महंगी दवाइयों के लिए भी मरीज को शहर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई डॉक्टर गैस की दवा लिखते है, गैस की दवा 5 रुपये में भी आती है, लेकिन डॉक्टर 110 रुपये वाला गैस की दवा लेने की सलाह लेंगे। रिम्स में इस तरह की लूट से हर कोई परेशान है। मरीज सरकारी के नाम पर अच्छे और सस्ते इलाज की उम्मीद से रिम्स में जाता है, पर मरीज को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो वह दोबारा रिम्स की ओर नहीं जाता है। रमेश नामक युवक रिम्स में इलाज कराने आये थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि पिछले 2 घंटे से पर्ची कटाने के लिए लगा हुआ था। पर्ची कट गयी थी, 2 घंटे डॉक्टर से चेक कराने के लिए कतार में खड़ा होना पड़ा। उन्होंने बताया कि यहां डॉक्टर की संख्या तो शुरू से ही कम है, पर पर्ची कटाने के लिए काउंटर की संख्या बढ़ानी चाहिए। वहीं, उन्होंने बताया कि पर्ची कटाने के बाद लोग बाप रे बाप आज पर्ची कट गयी... कहकर निकल रहे थे। जिले के कांके निवासी दानिश अंसारी ने कहा मेरे पिता को सीने में तेज दर्द था, पर्ची कटानी थी पर एमरजेंसी में भी पर्ची के लिए लंबी कतार थी। उन्होंने बताया पर्ची कटाने के बाद डॉक्टर से चेकअप के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर इलाज हो पाया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर रिम्स में इमर्जेन्सी में मरीज का इलाज कराते हैं तो इलाज से पहले ही मरीज दम तोड़ देगा। प्राइवेट अस्पताल में जा रहे हैं मरीज : रिम्स में कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि रिम्स की कुव्यवस्था के कारण रांची के 90 प्रतिशत लोग रिम्स की जगह बाहर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना पसंद करते है।
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