टीम एबीएन, चरही (हजारीबाग)। सीसीएल हजारीबाग कोयला क्षेत्र के तापीन साउथ कोलियरी से इन दिनों व्यापक पैमाने पर कोयले की हेरा फेरी की जा रही है। अभी तक हेराफेरी कर दर्जनों ट्रकों को कोलियरी परिसर से निकाल कर बिहार के डेहरी और उत्तर प्रदेश के कोल मंडियों में भेजा जा चुका है। कोयले की गोलमाल कोयला कारोबारियों के द्वारा किया जा रहा है। भारत सरकार ने कोयले को रेलवे साइडिंग भेजने के लिए सस्ते दरों पर उपलब्ध कराई है। उक्त कोयले को हाइवा वाहन के द्वारा किया जाना है। जिसकी दर करीब प्रति टन 3200 रुपये है। उस कोयले हाइवा नहीं भेजकर सीधे ट्रकों में लोडकर सीधे कोल मंडियों में भेजा जाता है। वहीं सस्ते वाले कोयले की कीमत मंडियों में प्रति टन 15 हजार रुपये बेचे जा रहे हैं। इस हेराफेरी का भंडा तब फूटा जब 6 अक्टूबर से अब तक 12 हाइवा वाहन से कोयले को कुजू रेलवे साइडिंग ले जाना था। उस कोयले को ट्रक के माध्यम से साइडिंग ना ले जाकर कोलियरी परिसर से कोल मंडी भेज दिया गया। कोयला कारोबारियों को प्रति ट्रक ढाई से तीन लाख रुपये की काली कमाई हो रही है। भारत सरकार को लाखों रुपए की चपत लग रही है, जो जांच का विषय है।