टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार से झारखंड के प्रारंभिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। शिक्षक अपनी 4 मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन करेंगे। आज अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की राज्य कार्यकारिणी की रांची जिले में होनेवाली बैठक में इसकी घोषणा की जाएगी। इससे पहले संघ के आह्वान पर प्रदेश के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के शिक्षकों ने शनिवार को 4 सूत्री मांगों को लेकर राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों के माध्यम से सीएम हेमंत सोरेन को मांग पत्र प्रेषित किया।
दरअसल, मांगों में शिक्षकों के लिए एमएसपी लागू करना, छठे वेतनमान की विसंगतियों को दूर करना, अंतर जिला स्थानांतरण को सरल और सुलभ बनाना तथा शिक्षकों को अत्यधिक लिपिकीय और गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करना है। शिक्षकों ने जिला समाहरणालयों में मांग पत्र उपायुक्तों को सौंपे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष बृजेंद्र चौबे तथा महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने बताया कि शिक्षकों को एमएसीपी के लाभ से अब तक वंचित रखा गया है, जबकि बिहार सरकार ने इसे अपने शिक्षकों के लिए लागू कर दिया है। शिक्षकों के छठे वेतनमान की विसंगतियों का निराकरण अब तक नहीं किया गया जबकि सदृश मामले में सचिवालय कर्मियों के मामले का सरकार ने समाधान कर दिया है।
प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षकों के अंतर जिला स्थानांतरण की वर्तमान व्यवस्था ना काफी एवं अपूर्ण है, जिसमें आवश्यक संशोधन किया जाना जरूरी है। नसीम अहमद ने कहा कि महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश सरकार ने ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी आरक्षण बचाया। बिहार भी इसी राह पर है, लेकिन झारखंड सरकार खामोश है। वहीं, राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने आशंका जाहिर की है कि सरकार ओबीसी आरक्षण के बगैर निकाय चुनाव कराना चाहती है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण को बचाने व आने वाले स्थानीय निकायों के चुनावों में ओबीसी आरक्षण बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट का रिपोर्ट पेश कर ओबीसी आरक्षण को लागू कराया। बिहार सरकार भी इस कोशिश में लगी है। झारखंड सरकार ने बगैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत के चुनाव कराये। अब नगर निकाय का चुनाव भी इसी तर्ज पर करने की प्रक्रिया आरंभ हो रही है।
राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार इन राज्यों की तरह ओबीसी आरक्षण बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। इससे भविष्य में स्थानीय निकायों से ओबीसी प्रतिनिधित्व का पत्ता साफ हो जायेगा। सरकार को इस पर अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कमीशन का गठन कर ओबीसी के इम्पीरिकल डाटा प्रक्रिया की प्रक्रिया शुरू करे। इसके लिए राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने कई आंदोलन किये हैं। राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा सरकार तथा सरकार व विपक्ष के ओबीसी विधायकों से अपील करता है कि इसके लिये सरकार को बाध्य करें।