Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
झारखंड

हजारीबाग : एचएमसीएच का पोस्टमार्टम हाउस, जहां मुर्दों को करना पड़ता है डॉक्टरों का इंतजार...

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
हजारीबाग : एचएमसीएच का पोस्टमार्टम हाउस, जहां मुर्दों को करना पड़ता है डॉक्टरों का इंतजार...
विज्ञापन
टीम एबीएन, हजारीबाग। हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल का पोस्टमार्टम हाउस जहां मुर्दों को भी डॉक्टरों के आने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। ये किसी एक दिन का हालात नहीं बल्कि हर दिन ऐसा ही होता है। आप अगर किसी शव को यहां पोस्टमार्टम के लिए लाते हैं तो ड्यूटी रोस्टर में तैनात डॉक्टर या तो अपने घर पर रहेंगे या ड्यूटी रोस्टर में नाम रहने के बावजूद हजारीबाग से बाहर रहेंगे। ऐसी परिस्थिति में जहां मृतक शवों को डॉक्टर के आने का घंटों इंतजार करना पड़ता है वहीं मृतक के परिजनों को भी बेवजह मशक्कत करनी पड़ती है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन भी पूरी तरह पंगु बन चुका है। कई एक बार किस प्रकार की शिकायत किए जाने के बाद किसी अन्य डॉक्टर को जिनका ड्यूटी नहीं रहता उन्हें भेज कर पोस्टमार्टम करा दिया जाता है लेकिन इस व्यवस्था में सुधार को लेकर कोई मुकम्मल पहल नहीं की जाती है। रविवार की सुबह जब एक भीषण सड़क दुर्घटना में चार मृतकों का पोस्टमार्टम कराने हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल एचएमसीएच के पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे तो स्थिति देखकर हतप्रभ रह गए। ड्यूटी रोस्टर में जिन डॉक्टरों का नाम था वो यहां उपस्थित नहीं थे। वो भी ऐसे वक्त पर जब जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी के साथ अस्पताल प्रबंधन के वरीय अधिकारी भी यहां खुद मौजूद थे। विधायक मनीष जायसवाल इस मामले को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज हजारीबाग के पोस्टमार्टम हाउस में फिलवक्त 10 शव पड़ा है और सभी को धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों के आने का बेसब्री से इंतजार है। विधायक मनीष जायसवाल ने चिकित्सा के पुलिस पेशे पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ऐसे की अकर्मण्य चिकित्सकों के कारण यह पेशा बदनाम है। पीड़ित मानवता की सेवा के लिए आप चिकित्सक बनते हैं लेकिन सरकार से वेतन लेकर आप ड्यूटी से गायब रहते हैं यह आपकी ओछी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि मैं ईश्वर से कामना करता हूं ऐसे कामचोर और अकर्मण्य चिकित्सकों को ईश्वरीय प्रकोप का दुष्प्रभाव अवश्य लगे। उन्होंने कहा कि एचएमसीएच इन दिनों निक्कम्मेपन का पर्याय बन चुका है। जनता बेहाल है, कहां सो रही है झारखण्ड का स्वास्थ्य विभाग? यही निक्कम्मेपन ने आज से कुछ दिन पूर्व एक नवजात की जान ले ली थी जब ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं थे और उसका गवाह मैं खुद वहां मौजूद था। उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में डिप्टी सुपरिटेंडेंट को अवगत कराया है जल्द ही हजारीबाग उपायुक्त और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को भी अवगत कराऊंगा। विधायक मनीष जायसवाल ने राज्य सरकार से पूछा कि झारखण्ड सरकार कब तक ऐसे डॉक्टरों का फिरौती वाले रवैये के समक्ष दंडवत रहेगी और जनता को बदहाली और तंगहाली में जीने को बिबस करेगी?
विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 39,538