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धान-दलहनी फसलों के रकबे में मामूली सुधार, 24 लाख हेक्टेयर से अधिक पर सूखे की मार

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धान-दलहनी फसलों के रकबे में मामूली सुधार, 24 लाख हेक्टेयर से अधिक पर सूखे की मार
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। खरीफ सीजन की फसलों पर इस बार सूखे की मार पड़ी है। मानसून में कम बारिश होने की वजह से देश के कई राज्यों में इस खरीफ सीजन धान, दलहन और तिलहन की फसलें प्रभावित हुई है। मसलन कम बारिश होने की वजह से कई राज्य सूखे का सामना कर रहे हैं। नतीजतन इस वजह से धान, दलहन और तिलहन फसलों का रकबा घटा था। जिसकी जानकारी बीते सप्ताह केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से दी गई थी। असल में कृषि मंत्रालय प्रत्येक शुक्रवार को खरीफ फसलों के अनुमानित रकबे पर रिपोर्ट जारी करता है। नई रिपोर्ट में पिछले सप्ताह के मुकाबले धान और दलहन के रकबे में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन, इस सुधार के बाद भी पिछले साल के धान और दलहनी फसलों से जुड़े 24 लाख हेक्टेयर से खेत सूखे पड़े हैं। कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी फसल रकबे पर आधारित साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार देश में दलहनी फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना अभी भी 5.56 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि 9 सितंबर की तुलना में दलहनी फसलों के रकबे में 1 लाख हेक्टेयर का सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बीते साल देश के अंदर दलहनी फसलों का कुल रकबा 137.50 लाख हेक्टेयर था, जो मौजूदा समय में 131.92 लाख हेक्टेयर पर दर्ज किया गया है। मानसून की वजह से इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कम बारिश दर्ज की गई है। इस वजह से बने सूखे जैसे हालतों की चलते इन चारों राज्यों में बड़ी संख्या में धान की फसल पर असर पड़ा है, जिसे देखते हुए केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने खरीफ सीजन में चावल के उत्पादन में 10 से 12 मिलियन टन गिरावट होने का अनुमान जारी किया गया है। हालांकि उस दौरान मंत्रालय ने उसे प्रांरभिक अनुमान बताया था। लेकिन, जिस तरीके से धान के रकबे में मामूली बढ़ोतरी हुई है तो कहा जा सकता है कि चावल उत्पादन के अनुमान में कोई व्यापक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
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