एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की सदस्य नीता अंबानी ने मंगलवार को कहा कि देश में ओलंपिक आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा। श्रीमती अंबानी ने ओडिशा में आईओसी द्वारा भारत के पहले ह्यओलंपिक मूल्य शिक्षा कार्यक्रम (ओवीईपी) के लॉन्च पर कहा कि ओलंपिक की मूल भावना के अनुरूप यह कार्यक्रम शिक्षा और खेल की दोहरी शक्तियों को साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि ओलंपिक समिति ने यह शिक्षा कार्यक्रम युवाओं को उत्कृष्टता, सम्मान और दोस्ती के ओलंपिक मूल्यों से परिचित कराने के लिए तैयार किया है। मूल्य-आधारित इस पाठ्यक्रम को मुंबई में प्रस्तावित आईओसी 2023 सत्र से पहले शुरू किया जा रहा है। श्रीमती अंबानी ने इस शिक्षा कार्यक्रम के बारे में कहा, भारत महान अवसरों और अनंत संभावनाओं का देश है। हमारे स्कूलों में 25 करोड़ से अधिक बच्चे हैं, जिनमें प्रतिभा और क्षमता है। वे कल के चैंपियन हैं, हमारे देश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा, दुनिया में बहुत कम बच्चे ही ओलंपियन बन पाते हैं, लेकिन हर बच्चे को ओलंपिक के आदर्शों से अवगत कराया जा सकता है। यही ओवीईपी का मिशन है और यही इसे भारत के लिए एक बड़ा अवसर बनाता है। ऐसे में जब हम अगले साल मुंबई में आईओसी सत्र 2023 की मेजबानी की तैयारी कर रहे हैं, मैं आशा करती हूं कि देश में ओलंपिक आंदोलन और मजबूत होगा। ओवीईपी को ओडिशा की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जाएगा। कार्यक्रम को स्कूल और जन शिक्षा विभाग, उड़ीसा सरकार और अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। श्रीमती अंबानी ने भारत के ओलंपिक सपने के समर्थन और जमीनी स्तर पर विकास के लिए उड़ीसा सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, श्री नवीन पटनायक के दूरदर्शी नेतृत्व में ओडिशा, भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं का केंद्र बन गया है। राज्य सक्रिय रूप से खेल के लिए एक समग्र इकोसिस्टम बना रहा है, जो हमारे युवा एथलीटों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। ओवीईपी-आधारित परियोजनाएं और गतिविधियां, खराब जीवन शैली, एकाग्रता की कमी और किशोरों के स्कूल छोड़ने जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में मदद करती हैं। प्रोग्राम के संसाधनों और टूलकिट को ऐसे डिजाइन किया गया है कि युवा, शारीरिक गतिविधि का आनंद लेने के साथ मानसिक शक्ति भी हासिल करें। कार्यक्रम का लक्ष्य, पहले वर्ष में भुवनेश्वर और राउरकेला के 90 स्कूलों में नामांकित 32,000 बच्चों तक पहुंचना है और एक बार पूरी तरह शुरू होने के बाद, इसे लगभग 70 लाख बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।