एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत की विदेश नीति की इन दिनों जमकर तारीफ हो रही है। दुनियाभर में भारत की विदेश नीति का डंका बज रहा है। रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत ने बड़ी ही चतुराई से स्थितियों को संभाला। भारत ने अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस को न तो खफा किया और न ही पश्चिमी देशों की नाराजगी मोल ली। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंग में शामिल रूस और यूक्रेन दोनों देशों के प्रमुखों से बात की बल्कि उनके साथ तालमेल भी बनाए रखा। यहां जो भारत की सबसे खास बात रही वो यह कि भारत अपनी नीति पर चला किसी के पलड़े पर या बातों में नहीं आया। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने पिछले दिनों भारत की जमकर तारीफ की थी। इमरान खान ने कहा कि भारत अमेरिका का रणनीतिक भागीदार है और वह रूस से तेल आयात करता है। भारत का कहना है कि उसके फैसले अपनी जनता की भलाई पर आधारित होते हैं। पूर्व पाक पीएम ने भारत की तारीफ करते हुए भारतीयों को खुद्दार कौम बताया था। भारत की कुशल विदेश नीति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर की भी काफी तारीफ हो रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अन्य देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने में कूटनीति काम आई। इसी बीच जयशंकर का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा जिसमें वे अंग्रेजों के साथ बैठकर उनके सामने उनकी जमकर धुलाई कर रहे हैं। इस दौरान जयशंकर ने भारत और पश्चिमी देशों के इतिहास का जिक्र किया। यह वीडियो अक्तूबर 2019 का है। अटलांटिक काउंसिल के साउथ एशिया सेंटर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ राउंडटेबल कन्वर्सेशन का आयोजन किया था। इसमें विदेश मंत्री ने गोरों के सामने बैठकर उन्हें जबरदस्त लताड़ लगाई थी। राउंडटेबल कन्वर्सेशन में जयशंकर ने अंग्रेजों द्वारा भारत में की गई लूटपाट का इतिहास याद दिलाया था। विदेश मंत्री ने तब कहा था कि आप में से कई लोगों ने दूसरे देश में अपमान की सदी शब्द सुना होगा। हालांकि, सच यह है कि भारत को दो सदियों तक पश्चिमी देशों का अपमान सहना पड़ा। जयशंकर का यह वीडियो ऐसे समय में वायरल हुआ है जब हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत का दो दिवसीय दौरे पर होकर गए हैं। जयशंकर ने बड़ी बेबाकी से कहा था कि पश्चिम देश डकैत की तरह 18वीं शताब्दी के मध्य में भारत आए। उसके बाद लगभग 190 सालों तक भारत पर राज किया। इस दौरान जयशंकर ने एक आर्थिक अध्ययन का भी जिक्र किया था। जयशंकर ने इसका हवाला देते हुए कहा था कि इसमें यह अनुमान लगाने की कोशिश की गई थी कि ब्रिटिश भारत से कितना पैसा बाहर ले गए थे। उन्होंने कहा कि गणना के हिसाब से यह पाया गया कि आज के मूल्य के अनुसार ब्रिटिश भारत का लगभग 45 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (45 लाख करोड़ डॉलर) अपने साथ ले गए थे। उन्होंने कहा कि इससे अंदाजा हो जाना चाहिए कि उन 200 सालों में भारत में क्या-क्या हुआ होगा। जयशंकर ने कहा था कि भारत और पश्चिम का इतिहास अफीम की गुलामी का इतिहास है। यह एक घिनौना सच है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज के समय में जितनी जरूरत पश्चिम को भारत की है, भारत को भी पश्चिमी देशों की उतनी जरूरत है। यह रिश्ते संतुलन की एक मांग है।