एबीएन सेंट्रल डेस्क। 114 मल्टी रोल वाले लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के टेंडर के लिए भारतीय वायु सेना देश के अंदर विमानों के उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी नीति मॉडल पर बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट अपनाना पसंद करेगी। बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया विदेशी हथियार सिस्टम के अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तहत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में प्रदान की गई खरीद प्रक्रिया की एक कैटेगरी है और देश के अंदर उनका उत्पादन रक्षा कार्यक्रम में मेक इन इंडिया के तहत होता है। स्वदेशी एलसीए तेजस और 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट के साथ 114 एमआरएफए प्रोजेक्ट को भी भारतीय वायु सेना को उत्तरी और पश्चिमी दोनों विरोधियों पर बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता होगी। वहीं सरकारी सूत्रों ने बताया कि हम बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए जाना पसंद करेंगे, जिसे वेंडर भी पसंद करते हैं और जिनके कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है। तीन अमेरिकी विमान समेत F-18, F-15 और F-21, रूसी मिग -35, Su-35, फ्रेंच राफेल, स्वीडिश साब ग्रिपेन और यूरोफाइटर टाइफून विमान के कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। सूत्र ने आगे कहा कि भारतीय वायु सेना ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर इन कंपनियों के विचार भी मांगे थे, जिन्हें वे कार्यक्रम में चुनना चाहेंगे और उनमें से ज्यादातर ने सिर्फ ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए प्रायोरिटी दिखाई है। साथ ही सूत्रों ने कहा कि बल ने परियोजना पर सरकार से निर्देश मांगा है कि वो आगे की कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी के लिए प्रोजेक्ट को कब आगे बढ़ा सकता है। सूत्रों ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान के दो स्क्वाड्रन 35 विमानों के साथ पूरी तरह काम करते है, जो पहले ही फ्रांस से आ चुके हैं। वहीं अब डिलीवरी के लिए सिर्फ एक विमान बचा है। सूत्रों ने आगे कहा कि इंडियन एयरफोर्स को निश्चित रूप से अधिक विमानों की आवश्यकता होगी, क्योंकि दोनों स्क्वाड्रन केवल बल की आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।