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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अपील- लाभप्रद हो कृषि, जो किसानों के जीवन स्तर में बदलाव लाये

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अपील- लाभप्रद हो कृषि, जो किसानों के जीवन स्तर में बदलाव लाये
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि हमारा उद्देश्य एक ही है कि कृषि उन्नत और लाभप्रद हो, उत्पादकता बढ़े व किसानों के जीवन स्तर में बदलाव आएं, जिसके लिए नई ईजाद किस्मों का उपयोग भी राज्यों को योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए। ग्रीष्मकालीन अभियान के लिए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन तोमर की अध्यक्षता में हुआ। इसमें तोमर ने कहा कि ग्रीष्मकालीन फसलें न केवल अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं बल्कि रबी से खरीफ तक किसानों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करती हैं और फसल की तीव्रता में भी वृद्धि होती है। सरकार ने दलहन, तिलहन व पोषक-अनाज जैसी ग्रीष्मकालीन फसलों की खेती के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये नई पहल की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे देश की विविध भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां है, जिन्हें ध्यान में रखते हुए ग्रीष्म ऋतु की फसलें ज्यादा से ज्यादा ली जाना चाहिए। ये किसानों को कम लागत तथा कम समय में अतिरिक्त आमदनी देने वाली होती है, राज्यों और किसानों के सहयोग से जायद फसलों का रकबा बढ़ रहा है। किसानों के सहयोग व सरकारी प्रयासों से चावल सहित जायद फसलों का रकबा 2017-18 में 29.71 लाख हेक्टेयर से 2.7 गुना बढ़कर 2020-21 में 80.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। तोमर ने कहा कि देश में कृषि व किसान कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है और राज्यों के साथ पूरी गंभीरता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि गत सीजन में उवरर्कों के मामले में कुछ जगह एकाएक परिस्थितियां पैदा हुई और कुछ लोगों ने अनावश्यक तूल दिया पर केंद्र और राज्य सरकारें पहले से सजग थी, इसलिए सबने मिलकर सूझबूझ से समस्या पर नियंत्रण पाने में सफलता हासिल की। कृषि मंत्री ने कहा कि देश को जितने फटिर्लाइजर की आवश्यकता थी, वह पूरी मात्रा केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराने का भरपूर प्रयत्न किया है, आगामी सीजन के लिए भी राज्य सरकारें आवश्यक कार्यवाही कर एडवांस में पर्याप्त उर्वरक ले लें। किसानों को फटिर्लाइजर की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। सम्मेलन में उर्वरक सचिव यह बात स्पष्ट कर चुके हैं। तोमर ने फटिर्लाइजर के अन्य विकल्पों का अधिकाधिक उपयोग करने पर जोर देते हुए कहा कि केमिकल फटिर्लाइजर का इस्तेमाल कम होना चाहिए, जिसके लिए एडवांस प्लानिंग की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोविड की विषम परिस्थितियों के बावजूद किसानों ने अथक परिश्रम किया, जिससे वर्ष 2020-21 में 3086.47 लाख टन खाद्यान्न (चौथे अग्रिम अनुमान अनुसार) का उत्पादन हुआ, जो एक सर्वकालिक रिकॉडर् है। दलहन व तिलहन का उत्पादन क्रमश: 257.19 और 361.01 लाख टन के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कपास का उत्पादन 353.84 लाख गांठ होने का अनुमान है जिसके कारण भारत का विश्व में पहले स्थान पर पहुंचना तय है। उत्पादन और उत्पादकता के मोर्चे पर, बागवानी क्षेत्र ने पारंपरिक खाद्यान्न फसलों से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस पर फोकस किया है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ योजनाबद्ध ढंग से लक्ष्य तय करते हुए निचले स्तर तक किसानों को ट्रेनिंग देने की भी बात कही। उन्होंने, प्रधानमंत्री की संकल्पना के अनुसार, किसानों के डाटाबेस को पूर्ण करने में राज्यों से विशेष रूचि लेने का आग्रह किया, ताकि इससे किसान लाभान्वित हों।
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