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बिरसा मुंडा के प्रतिमा का मूल स्वरूप में बदलाव में देवेन्द्र नाथ महतो महाराष्ट्र सरकार से सुधार की मांग

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बिरसा मुंडा के प्रतिमा का मूल स्वरूप में बदलाव में देवेन्द्र नाथ महतो महाराष्ट्र सरकार से सुधार की मांग
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  • मुंबई में विभिन्न जगहों पर बिरसा मुंडा के प्रतिमा का मूल स्वरूप में बदलाव कर तारपा वाद्य यंत्र बजाते हुए स्थापित किया गया है,  देवेन्द्र नाथ महतो महाराष्ट्र सरकार से सुधार की मांग
  • JLKM नेता देवेन्द्र नाथ महतो महाराष्ट्र सरकार के मंत्री प्रताप बाबूराव से मुलाकात कर झारखंडी प्रवासी मजदूरों के कल्याण और महाराष्ट्र में स्थापित बिरसा मुंडा के प्रतिमा में सुधार की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
  • महाराष्ट्र में झारखंड के प्रवासी मजदूरों के कल्याण और महाराष्ट्र में स्थापित बिरसा मुंडा की ऐतिहासिक वास्तविक स्वरूप से किया गया बदलाव को सुधार किया जाय - देवेन्द्र नाथ महतो

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देवेन्द्र नाथ महतो और महाराष्ट्र के माननीय मंत्री के बीच बिरसा मुंडा और छत्रपति शिवाजी महाराज दोनों महान जननायकों के प्रतीक चिह्नों का आदान-प्रदान झारखंड और महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव तथा परस्पर सम्मान की भावना का प्रतीक बना।

झारखंड के युवा आंदोलनकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं JLKM केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने अपने मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र सरकार के माननीय परिवहन मंत्री श्री प्रताप बाबूराव सरनाईक जी से मुलाकात कर महाराष्ट्र में कार्यरत झारखंड के प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के समाधान तथा धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की ऐतिहासिक तथा वास्तविक स्वरूप को बदलाव कर स्थापित किए गए प्रतिमा को सुधार करने की माँगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

उल्लेखनीय है कि इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा मुंबई में आयोजित India Today Conclave 2026 में झारखंड के युवाओं, झारखंडियत और जनसरोकारों को राष्ट्रीय मंच पर रखने के लिए आमंत्रित देवेन्द्र नाथ महतो ने अपने मुंबई प्रवास के दौरान प्रवासी मजदूरों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं, संघर्षों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया। 

इसी क्रम में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के समक्ष इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने की माँग रखी। मुलाकात के दौरान देवेन्द्र नाथ महतो ने माननीय मंत्री श्री प्रताप बाबूराव सरनाईक जी को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का छायाचित्र प्रतीक चिह्न के रूप में भेंट किया। इसके प्रत्युत्तर में मंत्री जी ने उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रतीक चिह्न भेंट किया।

दोनों महान जननायकों के प्रतीक चिह्नों का यह आदान-प्रदान झारखंड और महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव तथा परस्पर सम्मान की भावना का प्रतीक बना।देवेन्द्र नाथ महतो ने ज्ञापन के माध्यम कहा कि झारखंड के लगभग 10 लाख प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र के मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पालघर और अन्य क्षेत्रों में मेहनत-मजदूरी कर महाराष्ट्र तथा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। 

इसके बावजूद उन्हें आवागमन, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, सरकारी कार्यों और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए महाराष्ट्र तथा झारखंड दोनों राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और ठोस संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है।

उन्होंने प्रवासी मजदूरों की सुविधा के लिए धनबाद से मुंबई के बीच प्रतिदिन विशेष ट्रेन चलाने हेतु संबंधित रेल मंत्रालय एवं रेलवे प्रशासन से अनुशंसा करने, मुंबई में झारखंड भवन की स्थापना तथा वहाँ झारखंड सरकार के अधिकृत पदाधिकारियों की नियुक्ति की व्यवस्था करने की माँग की। प्रस्तावित झारखंड भवन में सरकारी दस्तावेजों, प्रमाण-पत्रों, श्रमिक पंजीकरण, प्रशासनिक मार्गदर्शन, अस्थायी ठहराव और आपातकालीन सहायता जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

श्री महतो ने कहा कि प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए झारखंड एवं महाराष्ट्र सरकार के समन्वय से प्रवासी मजदूर कल्याण आयोग अथवा प्रभावी संस्थागत व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए। इसके साथ ही हेल्पलाइन, शिकायत निवारण प्रणाली और मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे सहित प्रमुख श्रमिक क्षेत्रों में सहायता केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि मजदूरों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना न पड़े।

उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए समय पर उचित मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, किफायती और स्वच्छ आवास, बच्चों की शिक्षा तथा पात्रता के अनुसार राशन, पेंशन और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की भी माँग की। 

मजदूरी विवाद, कार्यस्थल पर शोषण और अन्य श्रम संबंधी समस्याओं के मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा दोनों राज्यों के संबंधित विभागों, श्रमिक संगठनों और मजदूर प्रतिनिधियों को शामिल कर समन्वय समिति गठित करने का आग्रह किया।

भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक एवं वास्तविक स्वरूप में स्थापित हो: देवेन्द्र नाथ महतो

मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य में भगवान बिरसा मुंडा की कई जगहों पर भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है लेकिन हर जगह एतिहासिक वास्तविक मूल स्वरूप में बदलाव किया गया है।

बिरसा मुंडा के हाथ में पकड़े हुए तीर-धनुष या जलते मशाल को बदलाव कर तारपा वाद्य यंत्र बजाते हुए स्थापित किया गया है उसे वास्तविक मूल स्वरूप में स्थापित किया जाय क्योंकि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के गौरव, आदिवासी स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन के अधिकार और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के महान प्रतीक हैं। 

उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के शोषण, अत्याचार और दमनकारी व्यवस्था के विरुद्ध ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में हुआ उलगुलान भारतीय इतिहास में जनप्रतिरोध, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की चेतना का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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