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अप्रैल में 23% से अगस्त में 37% तक पहुंच गयी महंगाई

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अप्रैल में 23% से अगस्त में 37% तक पहुंच गयी महंगाई
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  • देश में महंगाई का दायरा तेजी से बढ़ा, अप्रैल के 23% से अगस्त में 37% तक पहुंचा आंकड़ा
  • भारत में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। चार फीसदी से ज्यादा महंगाई वाली उपभोक्ता बास्केट की हिस्सेदारी अप्रैल के 23% से अगस्त में 37% पहुंच गई। जानिए वजह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की उपभोक्ता बास्केट पर महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के अनुसार रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत से अधिक महंगाई के लक्ष्य का भारांश उपभोक्ता बास्केट पर अप्रैल में 23 प्रतिशत था और यह अगस्त में बढ़कर करीब 37 प्रतिशत हो गया।

इस वृद्धि से पता चलता है कि समग्र महंगाई (हेडलाइन इंफ्लेशन) में हालिया उछाल अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट के कुछ ही हिस्सों तक सीमित नहीं है। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस बास्केट पर महंगाई का दायरा बढ़ने लगा है और इससे क्रमिक रूप से महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है।

केंद्रीय बैंक का प्रसार सूचकांक (डिफ्यूजन इंडेक्स) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को चार श्रेणी में बांटता है : 2 प्रतिशत से कम महंगाई, 2 से 4 प्रतिशत के बीच, 4 से 6 प्रतिशत के बीच और 6 प्रतिशत से ज्यादा महंगाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़्यादा महंगाई वाली श्रेणी में अधिक वस्तुओं की हिस्सेदारी के साथ समग्र महंगाई बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव ज्यादा और आम होता जा रहा है।

यह दायरा तब बढ़ रहा है जब समग्र और अंतर्निहित महंगाई (अंडरलाइंग इंफ्लेशन) में भी तेजी आ रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की महंगाई जुलाई के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.8 प्रतिशत हो गई। हालांकि इस अवधि में खाने-पीने की चीजों और ईंधन को छोड़कर महंगाई 3.9 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई।

 वैसे मूल्यवान धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई भी जुलाई के 2.7 प्रतिशत से बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई। मौद्रिक नीति समीक्षा में बताया गया कि सेवा क्षेत्र में भी अगस्त में महंगाई बढ़ी जबकि इससे पहले महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की वजह से बढ़ी थी।

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