टीम एबीएन। शराबमुक्त बिहार की घोषणा के वर्षों बाद आज भी दर्जनों गांवों में शराब चुलाने व बेचने का कारोबार निरंतर चल रहा है। मौत (दारू) का यह कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। दर्जनों गांवों में शराब चुलाई जा रही है। कई गांवों में तो शाम ढलते ही शराबियों का जमघट लगने लगता है। इस तरह की मौतों के बाद भी लोग या प्रशासन सबक नहीं ले रहा। बस कुछ दिन हाय तौबा और फिर से वही पुरानी चाल चलन...। नालंदा के हरनौत बाजार के दर्जनों लोगों ने बताया कि शराबबंदी का असर हर लोगों को भाने लगा था। लेकिन, कुछ ही माह बाद प्रशासनिक लापरवाही के कारण बेअसर दिखने लगा। गत माह मुख्यमंत्री के कड़े तेवर देखकर पुलिस महकमा में खलबली मच गई थी। शराब कारोबारी व शराबी को पकड़ने के लिए दिन रात अभियान भी चला। लेकिन, कुछ ही दिनों में फिर से वही रवैया शुरू हो गया। शराब का कारोबार एक बार फिर से पांव (नेटवर्क) पसारने लगा है। कभी हरनौत बाजार में शराबी शराब के नशे में धुत होकर पुलिस वाले का सर फोड़ देते हैं, कभी तेलमर गांव में बिजली गुल कर पुलिस कर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर परेशान करते हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब के धंधेबाजों का विरोध करने पर आम लोगों के साथ क्या सलूक किया जा सकता है। पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम शराब चुलाने व बेचने का कारोबार चल रहा है।