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बंगाल चुनाव : आदिवासी वोट पर भाजपा की गिद्ध दृष्टि

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बंगाल चुनाव : आदिवासी वोट पर भाजपा की गिद्ध दृष्टि
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पश्चिम बंगाल चुनाव: आदिवासी वोट बैंक पर भाजपा की नजर, झारखंड के दिग्गज नेता मैदान में; तृणमूल की है यह रणनीति 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं। भारतीय जनता पार्टी इस बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरी है और विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। 

खासतौर पर आदिवासी वोट बैंक को लेकर पार्टी ने विशेष ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि झारखंड से सटे जिलों में इन मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने झारखंड के प्रमुख आदिवासी नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारने का फैसला लिया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी समेत एक दर्जन से अधिक नेताओं को सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है। ये नेता जनसभाओं, पदयात्राओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए आदिवासी मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास करेंगे। जानकारी के अनुसार, चंपई सोरेन जल्द ही बंगाल रवाना होंगे, जबकि अन्य नेताओं के दौरे भी लगातार जारी रहेंगे। 

तृणमूल कांग्रेस की जवाबी तैयारी 

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन 15 अप्रैल को पश्चिम बंगाल पहुंचकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। इससे आदिवासी मतदाताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र हो गयी है। 

पिछले प्रदर्शन और इस बार की चुनौती 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है। पिछले चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार माइक्रो-लेवल रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के सहारे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में झारखंड के नेताओं की सक्रियता को अहम माना जा रहा है। 

निर्णायक भूमिका में आदिवासी मतदाता 

झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के इलाकों में आदिवासी मतदाताओं की संख्या और प्रभाव को देखते हुए सभी दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। चुनावी समीकरणों में इन मतदाताओं की भूमिका परिणामों को प्रभावित करने वाली मानी जा रही है, जिससे यह मुकाबला और दिलचस्प बन गया है।

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