वित्त मंत्री द्वारा बजट 2026 में मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज को इनकम टैक्स और टीडीएस से पूरी तरह फ्री करने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। इसमें एक ऐसा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जो सड़क हादसों के शिकार लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है। अब मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) से मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स बिल्कुल नहीं लगेगा।
साथ ही इस ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जायेगा। वित्त मंत्री ने भाषण में कहा, मैं प्रस्ताव दे रही हूं कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिये गये ब्याज को इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। इस ब्याज पर कोई टीडीएस भी नहीं लगेगा। यह छूट अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बजट में साफ लिखा है कि मोटर वाहन दुर्घटना में घायल हुए लोग और उनके परिवार पहले से ही बहुत परेशान होते हैं। ऐसे में मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाना उनकी मुश्किलें और बढ़ा देता है। इसलिए अब इस ब्याज को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया जायेगा। चाहे ब्याज की रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अब उस पर कोई टैक्स नहीं कटेगा।
पुराने नियम क्या थे?
पहले एमएसीटी से मिलने वाले मुआवजे पर ब्याज को इनकम माना जाता था और उस पर टैक्स लगता था। टीडीएस के मामले में अगर एक साल में ब्याज 50,000 रुपये से कम होता था तो कोई कटौती नहीं होती थी। लेकिन इससे ज्यादा होने पर टीडीएस कट जाता था। अब यह पूरी सीमा खत्म हो गई है। यानी छोटी हो या बड़ी, ब्याज की कोई भी राशि हो, अब टीडीएस नहीं कटेगा।
कोर्ट में लंबित था मामला
यह मुद्दा काफी समय से अदालतों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल विचाराधीन है कि क्या एमएसीटी के ब्याज पर टीडीएस लगना चाहिए। 2024 में कोर्ट ने केंद्र और इनकम टैक्स विभाग से इस पर अपनी राय मांगी थी। 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच हो कि कितने लोगों के मुआवजे से टीडीएस काटा गया और वह पैसा रिफंड के रूप में पड़ा है क्योंकि कई लोग टैक्स स्लैब में ही नहीं आते।
बंबई हाई कोर्ट ने भी एक फैसले में कहा था कि क्लेम दाखिल होने से लेकर अवॉर्ड या अपील तक का ब्याज इनकम नहीं है, इसलिए उस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। इस प्रस्ताव से उन हजारों परिवारों को फायदा होगा जो सालों इंतजार के बाद मुआवजा पाते हैं और उसमें जुड़ा ब्याज भी टैक्स की वजह से कम हो जाता था।