एबीएन सेंट्रल डेस्क (नरसिंहपुर)। श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित तत्वज्ञान और मनुष्य जीवन के परम लक्ष्य पूर्ण मोक्ष को लेकर रविवार को जिला नरसिंहपुर के आमगांव छोटा में संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में एक विशाल सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में गीता, वेद और सूक्ष्मवेद के प्रमाणों के माध्यम से बताया गया कि चौरासी लाख योनियों में मनुष्य जीवन ही ऐसा अवसर है, जिसमें जन्म-मृत्यु के चक्र से सदा के लिए मुक्ति संभव है।
संत रामपाल जी महाराज ने गीता अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि साधक को सर्वभाव से उस परमेश्वर की शरण में जाना चाहिए, जिसकी कृपा से परम शांति और सनातन परमधाम सत्यलोक की प्राप्ति होती है। साथ ही गीता अध्याय 15 श्लोक 4 और अध्याय 4 श्लोक 34 के आधार पर यह बताया गया कि तत्वदर्शी संत से ही तत्वज्ञान प्राप्त होता है, जो अज्ञान रूपी बंधन को काटकर पूर्ण मोक्ष का मार्ग दिखाता है।
सत्संग में गीता अध्याय 17 श्लोक 23 के अनुसार ॐ, तत्सत तीन मंत्रों के रहस्य पर भी प्रकाश डाला गया और बताया गया कि तत्वदर्शी संत तीन प्रकार के नाम उपदेश द्वारा साधक को काल और पूर्ण परमात्मा के भेद से परिचित कराते हैं। संत रामपाल जी महाराज ने कबीर साहेब व संत गरीबदास जी की वाणियों के प्रमाण देते हुए तत्वदर्शी संत की पहचान, शास्त्रानुकूल भक्ति और पूर्ण गुरु की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया।
कार्यक्रम में गांव के भगत जीवन दास, चंद्र कांत, दिनेश प्रजापति, चंदू वर्मा, नीलेश वर्मा, शालक वर्मा, महेद्र शर्मा, जगमोहन शर्मा आदि भगतआत्माएं मौजूद रही। कार्यक्रम के अंत में संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को समझकर अनेक श्रद्धालुओं ने उनसे नाम दीक्षा ग्रहण की।
श्रद्धालुओं को यह भी जानकारी दी गई कि वे संत रामपाल जी महाराज का सत्संग प्रतिदिन साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे से 8:30 बजे तक देख-सुन सकते हैं तथा यू ट्यूब और संत रामपाल जी महाराज सर्च कर उनके प्रवचन आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। श्रद्धालुओं ने इस सत्संग को अपने जीवन का निर्णायक मोड़ बताया।