- मोदी की अभूतपूर्व कूटनीति: छह में से पांच जीसीसी देशों ने पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत का खाड़ी देशों के साथ जुड़ाव, पिछले दशक में बहुत बदल गया है और इस बदलाव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। 2014 के बाद से नई दिल्ली ने जो पश्चिम एशिया में उपलब्धि हासिल की है, वह भारत–खाड़ी संबंधों के इतिहास में अभूतपूर्व है।
यह साझेदारी हाइड्रोकार्बन और भारतीय कार्यबल पर अपनी शुरुआती निर्भरता से कहीं आगे बढ़ चुकी है और अब यह एक अधिक निश्चित, संस्थागत और राजनीतिक रूप से आत्मविश्वासी संबंध में बदल गई है। पीएम मोदी के खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के 15 दौरे, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्राओं में सबसे अधिक हैं, ने एक ऐसा गर्मजोशीपूर्ण और परिचित होने का स्तर पैदा किया है, जो पहले की सरकारें कभी भी नहीं कर पाईं।
स्वयं जीसीसी, जिसमें छह अरब देश शामिल हैं और जो सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय गठबंधनों में से एक है, पश्चिम एशिया के आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देता है।
इस नई आत्मविश्वास की एक उल्लेखनीय अभिव्यक्ति क्षेत्र के शीर्ष नागरिक सम्मान के रूप में सामने आई है। छह में से पांच खाड़ी देशों ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किए हैं और ओमान पिछले सप्ताह आर्डर ऑफ ओमान देकर इस सूची में शामिल हो गया है।
यह सम्मान 2019 में यूएई के आर्डर ऑफ ज़ायद, 2016 में सऊदी अरब के किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश, 2019 में बहरीन के किंग हमाद आर्डर ऑफ़ द रिनेसेन्स (फर्स्ट क्लास), और 2024 में कुवैत के ऑर्डर ऑफ़ मुबारक अल-कबीर के बाद प्रदान किया गया है।
सिर्फ़ औपचारिक प्रतीक नहीं महत्वपूर्ण रूप से, ये सम्मान केवल औपचारिक प्रतीक नहीं हैं। एक ऐसे क्षेत्र में, जहां ये सम्मान केवल उन राजनेताओं को दिए जाते हैं जिन्हें भरोसेमंद, विश्वसनीय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ये सम्मान अत्यधिक विश्वास का संकेत देते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पांच जीसीसी देशों से शीर्ष सम्मान प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक राजनेता हैं, यह एक राजनीतिक संदेश है, जो प्रतीकात्मकता से आगे जाता है और खाड़ी क्षेत्र का उनके नेतृत्व और भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा पर दीर्घकालिक विश्वास को प्रतिबिंबित करता है।
2014 से पहले मौजूद अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, यह क्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कई विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय आंतरिक प्रतिद्वंद्विताओं और क्षेत्र के राजनीतिक माहौल की जटिलताओं का हवाला देते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया पीएम मोदी के लिए एक कठिन क्षेत्र बन सकता है।
इसके बजाय, उन्होंने हर खाड़ी देश के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए, ऐसी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जो पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने हासिल नहीं की थी।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनका संबंध अक्सर असाधारण रूप से गर्मजोशी भरा और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित बताया जाता है। सऊदी के सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज़ के साथ उनकी बातचीत ने रणनीतिक सामंजस्य के एक चरण को सुगम बनाया।
बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा, कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह, ओमान के सुलतान हैथम बिन तारिक और कतर के अमीर शेख तमिम बिन हमद अल थानी, सभी ने ऐसे स्तर की खुली स्वीकृति और पहचान के साथ प्रतिक्रिया दी है, जो विदेश के किसी भी नेता को शायद ही दी गई हो। प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक सफलता इस प्रकार दर्ज की गई कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में, इसका समग्र प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है: प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान केवल उस परिवर्तन को औपचारिक रूप देते हैं, जो पहले से ही क्षेत्र के कूटनीतिक परिदृश्य में दिखाई दे रहा है। भारत को खाड़ी में लंबी अवधि की रणनीतिक व्यवस्था में एक स्थिर, भरोसेमंद और अनिवार्य साझेदार के रूप में देखा जाता है, विशेष रूप से जब क्षेत्र आर्थिक विविधीकरण, डिजिटल एकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक संतुलन के नए प्रारूपों की तलाश में है।
यह सद्भावना का कोई अस्थायी क्षण नहीं है बल्कि एक संरचनात्मक पुनर्निर्माण है। अब खाड़ी की पूर्व की ओर दृष्टि, भारत को हाशिये में नहीं, बल्कि अपनी दीर्घकालिक सोच के केंद्र में पाती है। मोदी के नेतृत्व में, भारत एक लेन-देन से जुड़े साझेदार की बजाय रणनीतिक भविष्य को आकार देने वाली शक्ति बन गया है, यह बदलाव वास्तव में भारत के पश्चिम एशिया के साथ संबंधों में अप्रत्याशित है।