पद्मश्री जमुना टुडू और गरीब किसान रामदास बेदिया को मिला द्रौपदी मुर्मू का न्योता, राष्ट्रपति भवन के विशेष डिनर में होंगी शामिल
एबीएन सेंट्रल डेस्क। झारखंड की बेटी जमुना टुडू, जिन्हें प्यार से लेडी टार्जन कहा जाता है। एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पहले उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया और अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में विशेष डिनर के लिए आमंत्रित किया है। उनके साथ ही रांची के अनगड़ा प्रखंड के बीसा गांव निवासी रामदास बेदिया को भी राष्ट्रपति का आमंत्रण मिला है।
दोनों की यह उपलब्धि न केवल झारखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। जमुना टुडू ने जंगलों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जो काम किया है, उसकी वजह से आज पूरी दुनिया उनकी तारीफ करती है। वहीं रामदास बेदिया को यह निमंत्रण निर्धारित समय से पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर बनाने की वजह से दिया गया है।
जमुना टुडू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव में हुआ है। शादी के बाद जब वे अपने ससुराल गांव रानी मटेली आयीं तो उन्होंने देखा कि जंगल तेजी से कट रहे हैं। जंगल माफियाओं ने पेड़ों की बेरहमी से कटाई ने उन्हें अंदर तक हिला दिया। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वे जंगलों की रक्षा करेंगी। जमुना ने अपने गांव की महिलाओं को इकट्ठा किया और वन रक्षा मंच की स्थापना की। इस मंच में अब हजारों महिलाएं जुड़ी हैं, जो जंगल माफियाओं का डटकर सामना करती हैं।
जमुना का सफर कठिनाइयों से भरा रहा। जंगल माफियाओं ने उन्हें बार-बार डराने की कोशिश की, लेकिन वे अडिग रहीं। अपने दृढ़ संकल्प और बल पर उन्होंने ना सिर्फ जंगलों की रक्षा की बल्कि स्थानीय लोगों को पर्यावरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। उनकी इस मुहिम ने लाखों पेड़ों को कटने से बचाया और जंगलों को फिर से हरा-भरा करने में मदद की। उनके इस काम की वजह से उन्हें 2019 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था।
अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमुना टुडू को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष डिनर के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण उनके पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों के लिए एक बड़ा सम्मान है। इस आयोजन में उनके साथ झारखंड के रांची के रामदास टुडू भी शामिल होंगे। यह मौका जमुना के लिए बेहद खास है, क्योंकि यह उनके संघर्ष और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलायी है।