मोदी सरकार के 11 साल : तीन बड़े कदम, जिन्होंने बदल दी आम जिंदगी
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस साल की शुरुआत में महाकुंभ प्रयागराज में था। वहां छोटे से छोटा रेहड़ी वाला भी यूपीआई पेमेंट ले रहा था। एक बार एक रेहड़ी वाले से बातचीत में पता चला कि उसके अकाउंट में एक लाख से ऊपर रुपये की बचत हो गयी है, क्योंकि यूपीआई से आये पेमेंट के अधिकांश हिस्से को वह बचत के रूप में सुरक्षित कर लेता है।
कैश से ही कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। पहले शायद उसके लिए यह संभव नहीं था। यह चमत्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-धन योजना और डिजिटल पेमेंट की क्रांति के कारण संभव हो पाया है। यदि जन-धन योजना में गरीब रेहड़ी वाले का बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस पर न खुलता तो शायद वह कभी बैंक खाता खोलने का सपना नहीं देख पाता।
मोदी सरकार का यह तीसरा कार्यकाल चल रहा है। 9 जून को सरकार के 11 साल पूरे हो गये हैं। यह जनता का विश्वास है, जो लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी सत्ता में बने हुए हैं। पिछले 11 सालों में दुनिया ने भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति को देखा है, लेकिन गरीब कल्याण को लेकर नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसी योजनाएं शुरू की, जो युग परिवर्तनकारी हैं।
अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री बनने के चंद महीने बाद नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना की शुरुआत की। इसमें जीरो बैलेंस में बैंक खाता खोला गया। शुरुआत में विपक्ष ने इस योजना को लेकर मोदी सरकार का उपहास उड़ाया, लेकिन योजना के तहत 55 करोड़ से ऊपर खाते खुले, जिनमें ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्र के लगभग 36.63 करोड़ खाते हैं। इन खातों में 2.30 लाख करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। अच्छी बात है कि 55.6% यानी 29.37 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
यह भी सच है कि दिसंबर 2023 में 20% खाता निष्क्रिय थे। हालांकि, निष्क्रिय खातों में भी 12,779 करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जब क्रांति आई तो सबसे बड़ा गेम चेंजर यूपीआई पेमेंट बना। यूपीआई से रुपये सीधे बैंक खाते में जाता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में बैंक खाते न खोले गए होते तो शायद यूपीआई पेमेंट को भी सफल नहीं किया जा सकता था।
मुझे याद है, जब मैं किशोर था और उत्तर प्रदेश में अपने गांव जाता था, तब गांवों के अधिकांश लोग खुले में शौच के लिए जाया करते थे। महिलाओं के लिए तो शौच जाने का एक निश्चित समय निर्धारित था। या वो अलसुबह अंधेरे में या शाम को सूरज छिपने के बाद शौच के लिए खेतों में जा सकती थीं। इससे ज्यादा पीड़ादायक उनके जीवन में कुछ नहीं था।
ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार पहली बार स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजना लेकर आई, लेकिन ईमानदारी से किसी ने इस मिशन को पूरा किया तो वह यही सरकार है। 2 अक्टूबर 2014 को नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। आज 9.63 करोड़ से अधिक शौचालय बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। यह एक ऐसा कदम है, जिसने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत के सिर से एक कलंक भी मिट गया।