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भारत-पाक तनाव के बीच की गयी विशेष प्रार्थना सभा

भारत-पाक तनाव के बीच की गयी विशेष प्रार्थना सभा
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। 11 मई रविवार को रोम स्थित संत पेत्रुस कॉलेज में अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय आभास के सदस्यों ने भारत-पाकिस्तान के बीच शांति और नव-निर्वाचित संत पापा लियो चौदहवें के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की। पवित्र मिस्सा से पूर्व ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी के सम्माननीय प्रोफेसर, श्रेण्य फादर प्रेम खलखो, येसु समाजी ने उपस्थित आदिवासी भाई-बहनों का हृदय से स्वागत किया और इस मिलन समारोह के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए इसकी आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया। 

पवित्र मिस्सा बलिदान का संचालन श्रेण्य फादर ख्रिस्ती, येसु समाजी ने किया। अपने प्रेरणादायक प्रवचन में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हम तभी येसु के सच्चे और अच्छे शिष्य बनते हैं जब हम उनके वचनों को न केवल सुनते हैं, बल्कि हृदय से स्वीकार कर उनके अनुसार जीवन जीते हैं। 

इस अवसर पर आभास परिवार ने नव-अभिषिक्त उपयाजकों—समीर, नवीन और विनय—को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह के अंत में आभास के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। 

आभास का आशय है अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय—जो भारत के विविध क्षेत्रों से उच्च शिक्षा या धर्म सेवा हेतु इटली आये हुए आदिवासी भाई-बहनों का एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समूह है। इस समारोह में 60 अधिक सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। 

पोप लियो चौदहवें का पहला रविवार संदेश 

पोप लियो चौदहवें ने रेजिना चैली प्रार्थना के उपरांत दुनिया के नेताओं से युद्ध समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहता को स्मरण करते हुए कहा, अब कभी युद्ध नहीं। उन्होंने विशेषकर यूक्रेन के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की मांग की, जहाँ निर्दोष लोग, विशेष रूप से बच्चे, युद्ध की भेंट चढ़ रहे हैं। 

उन्होंने आग्रह किया कि सभी बंदी रिहा हों और बच्चे अपने परिवारों में लौट सकें। गाजा पट्टी में हाल ही में हुए हमलों पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए उन्होंने तत्काल संघर्ष विराम और मानवीय सहायता की अपील की तथा सभी बंधकों की रिहाई की मांग की। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल की झड़पों को देखते हुए उन्होंने स्थायी समझौते की उम्मीद जतायी।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में अनेक स्थानों पर संघर्ष जारी हैं और इन सभी के लिए उन्होंने शांति की प्रार्थना की। अंत में उन्होंने मदर्स डे पर सभी माताओं को शुभकामनाएं दीं— जीवित और दिवंगत दोनों के लिए प्रार्थना करते हुए। पोप ने अपने पूरे संदेश में शांति, करुणा और मानवता की गूंजती पुकार दोहरायी।

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