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नोटबंदी: भारत के आर्थिक नवजागरण की दस्तक

नोटबंदी: भारत के आर्थिक नवजागरण की दस्तक
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नोटबदली से नोटबंदी पुस्तक का भव्य विमोचन

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। देश में जब नोटबंदी के फैसले पर बहस जारी है, तब एक शोधपूर्ण दस्तावेज़ ने इस निर्णय की गहराइयों को उजागर करते हुए सबको चौंका दिया है। नोटबदली से नोटबंदी: भारत के आर्थिक महाशक्ति बनाने की संकल्प यात्रा एवं उपलब्धियां—शीर्षक इस पुस्तक का लोकार्पण शनिवार को दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय पुस्तकालय सभागार में हुआ, जिसमें देश के शीर्ष राजनीतिक, न्यायिक, सैन्य और शैक्षणिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। 

राज्यसभा के उपसभापति और प्रख्यात पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा, नोटबंदी ने न केवल अर्थव्यवस्था में चुस्ती लाई, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी नकेल कसी। यह पुस्तक तथ्यों और शोध पर आधारित दस्तावेज़ है जो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर ले जाने की यात्रा का साक्षी है। पूर्व न्यायमूर्ति शम्भूनाथ श्रीवास्तव ने लेखक राजेश झा को उदीयमान आर्थिक इतिहासकार कहते हुए सराहा और कहा कि जब सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा है, तब यह पुस्तक एक ज़रूरी दस्तावेज़ के रूप में उभरती है। 

लेफ्टिनेंट जनरल ए.एस. रावत ने भी इस पुस्तक को सुरक्षा दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए नोटबंदी के राष्ट्रीय हितों पर पड़े प्रभाव को बेबाकी से प्रस्तुत करने के लिए लेखक की प्रशंसा की। वहीं, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अश्विनी महाजन ने इस पुस्तक को साहसिक बताते हुए कहा कि इसमें देश के नेताओं और नौकरशाहों की विफलताओं पर भी खुलकर चर्चा की गई है। शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. जे.एस. राजपूत ने कहा कि हिन्दी में इस तरह का शोधपूर्ण मौलिक लेखन विरल है और यह पुस्तक उस अभाव को पूरा करती है। 

पुस्तक के लेखक और वाणिज्यिक पत्रकार राजेश झा ने बताया कि यह पुस्तक आठ वर्षों की शोध यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा, 99% करेंसी वापसी को नाकामी मानने वाले यह नहीं बताते कि एक ही नंबर के तीन-चार नोट चलन में थे। इस हिसाब से 301% जाली नोट सिस्टम से बाहर हुए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले ने देश को आर्थिक पतन से बचाया। कार्यक्रम में देशभर से आए उच्चाधिकारी, प्रोफेसर, शोधार्थी और न्यायविद् शामिल हुए। 

102 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी आर. माधवन पिल्लई की उपस्थिति ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया, जिन्होंने राष्ट्रगीत गाकर माहौल को देशभक्ति से भर दिया। प्रकाशक संस्था आरजेपी की ओर से यह संकल्प लिया गया कि केवल राष्ट्रवाद प्रेरित सारगर्भित पुस्तकों का ही प्रकाशन किया जाएगा। यह पुस्तक केवल विमर्श नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनर्जागरण की घोषणा है — और आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होने जा रही है।

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