Breaking News
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

बछवारस व गोवत्स द्वादशी का त्योहार 30 अगस्त को

बछवारस व गोवत्स द्वादशी का त्योहार 30 अगस्त को
विज्ञापन

गाय और बछड़ों की पूजा करने से गाय मे वास करने वाले सैकड़ों देवताओं का मिलता है आशीर्वाद : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राजस्थानी महिलाओं का लोकप्रिय पर्व बछवारस 30 अगस्त को मनाया जायेगा। यह पर्व जन्माष्टमी के चार दिन बाद यानी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। 

इस दिन गौ माता की बछड़े सहित पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बछवारस के दिन गाय और बछड़ों की पूजा करने से भगवान कृष्ण सहित गाय में निवास करने वाले सैकड़ो देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। जिससे घर में खुशहाली और संपन्नता आती है। इस दिन माताएं अपने पुत्रों को तिलक लगाकर तलाई फोड़ने के बाद लड्डू का प्रसाद देती है। 

पुत्रवान महिलाएं अपने संतान की मंगल कामना के लिए व्रत रखती है और पूजा करती है। इस दिन गेहूं से बने पकवान एवं कटी हुई सब्जी नहीं खाए जाते हैं। बाजरे या ज्वार का सोगटा और अंकुरित अनाज की कढ़ी एवं सूखी सब्जी बनाई जाती है। महिलाएं द्वारा सुबह गौ माता की विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद घरों मे सामूहिक रूप से बनी मिट्टी व गोबर से बनी तलैया की अच्छी तरह सजाकर उसमें कच्चा दूध, दही, मोठ, कुमकुम, मोली, धूप दीप प्रज्वलित कर पूजा करती है। 

एक लकड़ी के पाटे पर मिट्टी से बछवारस बनाते हैं और उसमें बीच में एक गोल मिट्टी का बावड़ी बनाते हैं फिर उसको थोड़ा दूध दही से भर देते हैं, तथा सब चीज पूजा सामग्री चढ़ाकर पूजा करते हैं। और बछवारस की कहानी सुनी जाती है।

इस दिन घरों में विशेष कर बाजरे की रोटी बनती है, तथा इस दिन गाय की दूध की जगह भैंस का दूध का उपयोग किया जाता है। इस पर्व को गोवत्स द्वादशी भी कहते हैं। भगवान कृष्ण के गायों और बछड़ों से बड़ा प्रेम था इसलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.