बचपन बचाओ आंदोलन की शिकायत पर एनसीपीसीआर ने की छापे की कार्रवाई
मुक्त कराये गये 58 बच्चों में 19 लड़कियां
खतरनाक रसायनों के संपक्र में आने से ज्यादातर बच्चों के हाथ जले हुए थे
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बाल मजदूरी की रोकथाम के लिए एक बेहद अहम और सख्त कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (जिसे बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के नाम से जाना जाता है) के साथ मिलकर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में शराब बनाने की एक नामी फैक्टरी पर छापे की कार्रवाई में 58 बाल मजदूरों को मुक्त कराया।
बीबीए की सूचना पर एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की अगुवाई में सोम डिस्टिलरी पर मारे गये इस छापे में मुक्त कराये गये बच्चों में 19 लड़कियां और 39 लड़के हैं। इस मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है और मुक्त कराये गये बच्चों को सुरक्षित जगह भेज दिया गया है। खतरनाक रसायनों और अल्कोहल के संपर्क में आने से खासतौर से इन बच्चों के हाथ और शरीर के अन्य हिस्से जले हुए थे।
प्रशासन की आंख में धूल झोंकने के लिए इन बच्चों को स्कूल बस से डिस्टिलरी पहुंचाया जाता था, जहां इनसे मामूली तनख्वाह पर रोजाना 12-14 घंटे काम कराया जाता था। बताते चलें कि सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज शराब, बीयर और अन्य अल्कोहल उत्पाद बनाने वाली एक आईएसओ प्रमाणित कंपनी है। इस मामले में आबकारी अधिकारी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की है जिनका कार्यालय इसी डिस्टिलरी के परिसर में है।
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी डिस्टिलरी के कामकाज की निगरानी के लिए उस डिस्टिलरी के परिसर में आबकारी अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य है। बच्चों को मुक्त कराने की इस कार्रवाई पर संतोष जाहिर करते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा (जो छापामार टीम में भी शामिल थे) ने कहा कि अल्कोहल और रसायनों की दुर्गंध हम जैसे वयस्कों के लिए भी असहनीय है।
कल्पना ही की जा सकती है कि ये बच्चे इन स्थितियों में कैसे रोजाना इतने घंटे काम कर रहे थे। हम इस डिस्टिलरी के मालिकों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं ताकि यह दूसरों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सके। हम ऐसी भयावह स्थितियों में काम करने वाले बच्चों को मुक्त कराने का अपना अभियान जारी रखेंगे लेकिन देश को बाल मजदूरी के खिलाफ कड़े कानूनों और इसके खिलाफ निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
सरकार से हमारी अपील है कि वह बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी को रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाए ताकि बच्चों के साथ इस अन्याय और अत्याचार को रोका जा सके। बताते चलें कि इससे पहले 14 जून को एनसीपीसीआर ने बीबीए की शिकायत पर इसी जिले के मंडीदीप कस्बे में छापे की कार्रवाई में 25 लड़कियों सहित कुल 36 बाल मजदूरों को मुक्त कराया था। एनसीपीसीआर ने जून को एक्शन मंथ घोषित कर रखा है और पूरे देश में बच्चों की ट्रैफिकिंग और उन्हें बाल मजदूरी से मुक्त कराने के इस अभियान में बीबीए उसका सहयोग कर रहा है।