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कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल पुरानी पेंशन बहाली!

कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल पुरानी पेंशन बहाली!
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एनपीएस को खत्म करने पर अड़े एक करोड़ कर्मी 

  • एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय बंधु एवं उनके सहयोगियों ने खरगे को सौंपे अपने पत्र में कहा है कि देश में सरकारी कर्मचारी ओपीएस बहाली की मांग कर रहे हैं। एनपीएस में एक करोड़ कर्मचारी हैं। अगर इन कर्मियों के साथ इनके परिवार और पेंशनर फैमिली की भी गिनती करें, तो यह संख्या पांच करोड़ के पार पहुंच जाती है

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव की दहलीज पर एक बार फिर पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा गर्मा रहा है। जहां एक तरफ ज्वाइंट फोरम फॉर रेस्टोरेशन आफ ओल्ड पेंशन स्कीम (जेएफआरओपीएस)/नेशनल ज्वाइंट काउंसिल आफ एक्शन (एनजेसीए) के बैनर तले आंदोलन करने वाले विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने ओपीएस पर कोई अंतिम निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार को कुछ समय दे दिया है।

दूसरी ओर, नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के अध्यक्ष विजय बंधु ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर उनसे अपील की है कि वे पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण की समाप्ति के विषय को पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें। देश में करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारी, एनपीएस में शामिल हैं। 

वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय बंधु एवं उनके सहयोगियों ने खरगे को सौंपे अपने पत्र में कहा, देश में सरकारी कर्मचारी ओपीएस बहाली की मांग कर रहे हैं। एनपीएस में एक करोड़ कर्मचारी हैं। अगर इन कर्मियों के साथ इनके परिवार और पेंशनर फैमिली की भी गिनती करें, तो यह संख्या पांच करोड़ के पार पहुंच जाती है। कर्मचारियों का मानना है कि एनपीएस, सुरक्षित एवं विभेदकारी है। 

देश के समस्त कर्मचारी, जिनमें शिक्षक समुदाय प्रमुख है, वे इसका विरोध कर रहे हैं। ओपीएस बहाली के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। गत वर्ष एक अक्तूबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में पेंशन शंखनाद महारैली आयोजित की गई थी। 

उसके बाद देशभर में वोट फॉर ओपीएस अभियान शुरू किया गया। बंधु ने अपने पत्र में लिखा, संगठन द्वारा लगातार संघर्ष की बदौलत राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में एनपीएस को बंद कर पुरानी पेंशन बहाली की गयी। एनपीएस में सरकारी कर्मियों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। दूसरी तरफ निजीकरण से नौजवानों का वर्तमान चौपट हो रहा है। 

निजीकरण, निम्न और मध्यम वर्ग के खिलाफ साजिश है। राष्ट्रीय संपत्तियों और संस्थाओं के निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए। देश के अर्धसैनिक बलों को भी पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित कर दिया गया है। बंधु ने कहा कि सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को ओपीएस के जरिये सामाजिक सुरक्षा न देना, कौन सा राष्ट्रवाद है।

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