एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्वोच्च न्यायालय ने सांसदों और विधायकों के विशेषाधिकार को परिभाषित करते हुए सोमवार को निर्णय दिया कि पैसा लेकर प्रश्न पूछना, पैसा लेकर भाषण करना ओर पैसा लेकर सदन के भीतर वोट देना भ्रष्टाचार है और ऐसा करने वाले सांसदों, विधायकों पर मुकदमा चलेगा।
यह निर्णय स्वागत योग्य है, परंतु यदि कोई मंत्री संसद अथवा विधानसभा में किसी सांसद या विधायक के प्रश्न का गलत और गुमराह करने वाला उत्तर देता है और यह साबित हो जाता है कि जिसका संरक्षण देने के लिए वह उत्तर दे रहा है, उससे उसका संबंध है तो ऐसे मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार का मुकदमा चलना चाहिए। इस क्रम में सरयू राय ने झारखण्ड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष महोदय को जो पत्र लिखा है, वह भी इसी दायरे में आना चाहिए। इस पत्र की प्रति संलग्न है, जो स्वत: स्पष्ट है।
विधायक के रूप में सरयू राय ने विधानसभा में राज्य के माननीय स्वास्थ्य मंत्री से एक सवाल पूछा था कि जमशेदपुर की एक महिला चिकित्सक, रेणुका चैधरी ने कई वर्षों तक सेवा से अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन लिया और अनुपस्थिति की अवधि में फर्जी हस्ताक्षर उपस्थिति पंजिका में किया। एक बार दिनांक 19.08.2013 को तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति ने जांच की तो पाया कि ये आरोप सही है और चूंकि आरोपी चिकित्सक तब तक अवकाश ग्रहण कर चुकी थी, इसलिए उनके वेतन की पूरी कटौती करने का आदेश पारित हुआ।
परंतु जब विधायक सरयू राय ने विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में और इसके पूर्व रांची विधानसभा के विधायक सीपी सिंह ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संबंधित प्रश्न उठाया तो सरकार ने उत्तर दिया कि उस समय की उपस्थिति पंजिका जिला यक्ष्मा कार्यालय, जमशेदपुर से गायब हो गयी है और जिस लिपिक (संजय तिवारी) की अभिरक्षा में उपस्थिति पंजिका थी, उसने आत्महत्या कर ली है।
यानी जिस उपस्थिति पंजिका के आधार पर वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय समिति ने पाया कि डॉ रेणुका चैधरी ने उपस्थिति पंजिका पर फर्जी हस्ताक्षर किया है और जिस पंजिका के बारे में एक आरटीआई कार्यकर्ता को विभाग ने उत्तर दिया कि वह उपस्थिति पंजिका गायब नहीं हुई है, वहीं किसी और आरटीआई कार्यकर्ता को विभाग ने लिखित तौर पर बताया कि मांगे गये दस्तावेजों की प्रति खोजी गई, जिसमें उक्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
दूसरी ओर विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने उत्तर दिया कि वह उपस्थिति पंजिका गायब है और आरोपी चिकित्सक पर कार्रवाई करने के लिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्वी सिंहभूम जिला के सिविल सर्जन के उपर ही सही तथ्य नहीं बताने के लिए प्रपत्र क गठित कर विभागीय कार्यवाही आरंभ कर दिया है।
विधायक श्री सरयू राय ने इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है और कहा है कि यदि सभा व्यवस्थित होती तो इस प्रश्न के उत्तर पर वाद-विवाद होता तो वे इस बारे में कतिपय सवाल पूछते, परंतु सभा की कार्यवाही बाधित हो गयी, इसलिए सरकार के गलत उत्तर को वे परिभाषित नहीं कर सके।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि वे विधानसभा में गलत उत्तर देने वालों के खिलाफ सदन की अवमानना की कार्रवाई करे, परंतु जब आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पैसा लेकर प्रश्न आदि पूछने के बारे में सांसदों और विधायकों के विशेषाधिकार को परिभाषित कर दिया है, तब प्रश्न उठता है कि विधानसभा में गलत उत्तर देने वाले मंत्री के विरूद्ध भ्रष्टाचार के विरूद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है या नहीं।
यह सवाल विधायक सरयू राय माननीय विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठायेंगे ताकि सरकार में व्याप्त मंत्रियों का भ्रष्टाचार भी इस दायरे में आये और मंत्री बनकर भ्रष्टाचार करने वाले और भ्रष्टाचार के प्रभाव में गलत उत्तर देने वाले मंत्रियों के विरूद्ध भी आपराधिक कार्रवाई हो सके।