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धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक लक्ष्यों के साथ दृश्य चित्रण के मिश्रण का उदाहरण है जनजातीय दर्पण

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धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक लक्ष्यों के साथ दृश्य चित्रण के मिश्रण का उदाहरण है जनजातीय दर्पण
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  • महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में जनजातीय दर्पण गैलरी का किया उद्घाटन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति के रूप में एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के उपलक्ष्य में मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के मार्बल हॉल में जनजातीय दर्पण गैलरी का उद्घाटन किया। इस गैलरी की स्थापना राष्ट्रपति भवन द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से की गयी है।

जनजातीय दर्पण गैलरी को आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा प्रभाग ने क्यूरेट और क्रियान्वित किया है। मौके पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी सहित जनपद सम्पदा के विभागाध्यक्ष प्रो के अनिल कुमार और उनकी टीम भी उपस्थित थी। जनजातीय लोगों की कला दुनिया की सबसे विविध विरासतों में से एक है। 

यह मानवता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक : धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक लक्ष्यों के साथ दृश्य चित्रण के मिश्रण का उदाहरण है। इसकी बारीकियां और कलात्मक कौशल इसके रचनाकारों की नवीन सोच को दर्शाता है। यह महाद्वीप लोगों, समाजों और सभ्यताओं से परिपूर्ण है।

राष्ट्रपति की ओर से उद्घाटित जनजातीय दर्पण गैलरी का उद्देश्य समृद्ध कला, संस्कृति और इस राष्ट्र के निर्माण में जनजातीय समुदायों के योगदान की एक झलक प्रदान करना है। गैलरी में अलग-अलग विषय शामिल हैं।

जैसे कि गुमनाम जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों, पारंपरिक संसाधन प्रबंधन प्रथाओं- जैसे हलमा, टोकरा कला, संगीत वाद्य यंत्र, गुनजला गोंडी स्क्रिप्ट, कृषि और घरेलू उपकरण, बांस की बास्केट, वस्त्र, वॉली, गोंडी और कीचड़, स्क्रॉल, मैच, मास्क और गहने, धातु कर्म, हथियार, टैटू को प्रदर्शित करने वाले समकालीन चित्र, एक पारिस्थितिक परिवेश और राजदंड को प्रदर्शित करने वाली चित्रावली लगायी गयी है।

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