एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के सचिव राजीव बंसल ने बुधवार को बताया कि इस साल के अंत तक अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन सामान्य होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पिछले साल मार्च में देश में कोविड लॉकडाउन लगने के बाद प्रत्यावर्तन मिशन और आवश्यक दवाएं व खाद्य सामग्री ले जाने वाली उड़ानों को छोड़कर सभी अंतररष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। कोरोना के केस कम होने और ज्यादातर लोगों के वैक्सीन लगवाने के बाद ही इस प्रतिबंध में ढील दी गई थी। इसके लिए कई देशों के साथ एयर बबल व्यवस्थाओं के लिए बातचीत की गई थी। एयर बबल अरेंजमेंट के तहत कुछ शर्तें मानने पर सदस्य देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को एक दूसरे के क्षेत्रों में संचालित किया जा सकता है। पिछले हफ्ते नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि सरकार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया का मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार स्थिति को सामान्य बनाने के लिए उत्सुक है, लेकिन वह यह भी ध्यान रखेगी कि कोरोना वायरस संक्रमण की नई लहर को आने से रोका जा सके, विशेष रूप से कई प्रमुख यूरोपीय देशों में जब रोजाना कोरोनावायरस के नए मामलों में वृद्धि हो रही है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, "मैं विश्व में फिर से नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में अपनी जगह बनाने और देश में इसका हब बनाने व बड़े एयरक्राफ्ट के हक में हूं। हम यह जरूर हासिल करके रहेंगे, मुझ पर भरोसा करें। मैं आपके साथ हूं। हम सुरक्षित माहौल में साथ काम करेंगे। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान घरेलू उड़ानों को भी रद्द किया गया था, लेकिन पिछले महीने से इस पर से प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिया गया है। सरकार ने पिछले साल मई से धीरे धीरे कर घरेलू उड़ानों के आॅपरेशंस शुरू कर दिए थे। एयरलाइनों को शुरुआत में सभी पूर्व-कोविड मार्गों पर अधिकतम 33 प्रतिशत संचालन करने की अनुमति दी गई थी। पिछले साल दिसंबर तक इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 80 फीसदी कर दिया गया था। हालांकि, देश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर के कम होने के बाद इस साल जून में आॅक्युपेंसी रेट को घटा कर 50 प्रतिशत कर दिया गया था। अंतरराष्ट्रीय यात्री हवाई यात्रा को फिर से खोलने के लिए तैयारी के बीच सरकार ने पिछले महीने यह भी कहा था कि वह पर्यटक वीजा प्रदान करना फिर से शुरू करेगी। यह प्रक्रिया 15 नवंबर से फिर से शुरू कर दी गई है।