रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा ह्ययह घोषणा दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी भाजपा यह प्रचार करने में जुटी है कि प्रधानमंत्री किसानों के हितैषी हैं। यह तो वही बात हुई कि पहले किसी का गला दबाओ और यदि गला दबाने पर न मरे तो उसे गले से लगा लो और फिर बताओ कि हम आपके हितैषी हैं। ये बातें मुख्यमंत्री ने रांची हवाई अड्डे पर पत्रकारों से शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा यह मांग करती है कि प्रधानमंत्री तत्काल इस आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को पांच-पांच करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दें और उन्हें शहीद का दर्जा देने की घोषणा करें। जिन किसानों की मौत इस आंदोलन में हुई है उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी भी दी जाए। आंदोलनरत जिन किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं और न्यायालयों में मामले लंबित हैं उन सभी को केंद्र सरकार वापस लेने की घोषणा करें। पिछले सवा साल से सड़कों पर अपने बाल-बच्चों के साथ आंदोलन कर रहे किसानों को फसलों की क्षतिपूर्ति के लिए दस-दस लाख रुपये दिए जाएं। इसके साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री तत्काल इस्तीफा दें। मुख्यमंत्री ने केंद्र के फैसले को उत्तर प्रदेश के चुनाव से जोड़कर किए गए पत्रकारों के सवाल पर कहा कि भाजपा के इस निर्णय का विश्लेषण विशेषज्ञों के साथ चर्चा में सामने आएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा को चुनाव में होने वाले खामियाजा का एहसास हो गया था। यही कारण है कि भाजपा नेताओं की ओर से केंद्र सरकार को किसानों का हितैषी बताने के लिए वक्तव्य आ रहे हैं। देश के आंदोलनरत अन्नदाताओं के साथ जो व्यवहार हुआ उसे पूरे देश ने देखा। अब एक प्रोपेगेंडा के तहत भाजपा को किसानों का हितैषी बताने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन भाजपा का असल चेहरा उजागर हो गया है।
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