एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देशवासियों के सपने और आकांक्षाएं पूरी करने में सरकार के अन्य अंगों के साथ न्यायपालिका की भी भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार इस दिशा में न्यायपालिका के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने न्याय व्यवस्था में डिजिटल टेक्नोलॉजी के समावेशी पर विशेष बल दिया।
श्री मोदी ने यहां गुवाहाटी उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज 21वीं सदी में हर भारतवासी के सपने और आकांक्षाएं असीम हैं। इनकी पूर्ति में लोकतंत्र के स्तंभ के तौर पर हमारी सशक्त और संवेदनशील न्यायपालिका की भूमिका भी उतनी ही अहम है।
उन्होंने कहा कि जनाकांक्षाओं को पूरा करना विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों ही अंगों का दायित्व है कि हम इस काम को कैसे कर रहे हैं? इसका एक उदाहरण पुराने कामों को खत्म करना है। हमने अंग्रेजी शासन के समय से चले आ रहे, तमाम अप्रासंगिक कानूनों की पहचान की है और करीब दो हजार ऐसे कानून खत्म किए जा चुके हैं।
हमने कारोबारियों की सुविधा के लिए कालवाह्य हो चुके 40 हजार कम्प्लायन्स (औपचारिकताएं) खत्म किये हैं, व्यवसाय से संबंधित नियमों की चूक को संज्ञेय अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है, ताकि जीवन और कारोबार करना आसान हो सके।
श्री मोदी ने कहा कि सरकार और न्यायपालिका सहित व्यवस्था के सभी अंगों का दायित्व है कि जनता की जिदंगी आसान हो। इस काम में तकनीक का बड़ा महत्व है। उन्होंने इस संदर्भ में आधार, डिजिटल इंडिया मिशन, लाभ के प्रत्यक्ष हस्तांतरण जैसी पहल का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने पीएम स्वामित्व योजना का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के विकसित देश भी अचल संपत्ति के अधिकार की समस्या से जूझ रहे हैं। संपत्ति के स्पष्ट अधिकार के बिना व्यक्ति का विकास प्रभावित होता है।
मुकदमेबाजी बढ़ती है। पीएम स्वामित्व के तहत अब तक देश में एक लाख से अधिक ड्रोन मैपिंग पूरी की जा चुकी है और लोगों को संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे विवाद कम होंगे और न्यायपालिका पर लंबित मुकदमें का बोझ भी कम होगा।
प्रधानमंत्री ने न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के प्रयोग को बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए, इस दिशा में उच्चतम न्यायालय की विशेष समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट (आनलाइन न्यायालय) मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों तक न्यायिक सेवाएं पहुंचाने में डिजिटल टेक्नोलॉजी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्री मोदी ने न्यायपालिका से न्याय में जनता की सहूलियत के लिए एआई को शामिल करने पर ध्यान देने का भी आग्रह किया और कहा कि कई देशों में इसकी शुरूआत हो चुकी है। श्री मोदी कानून को सरल भाषा में लिखे जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे व्यवस्था के प्रति आम लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने अब नए कानूनों के मसौदे का एक सहज संस्करण भी लाने की शुरुआत की है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये बहुभाषी प्लेटफॉर्म भाषिनी का उपयोग किए जाने का भी आवाह्न किया।
प्रधानमंत्री ने परंपरागत स्थानीय न्याय प्रणालियों की समृद्ध परंपराओं का विधि पाठ्यक्रमों में समावेश करने का भी सुझाव दिया और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के विधि-विभाग द्वारा असम में स्थानीय न्याय व्यवस्था की परंपरा पर छह पुस्तकों के हाल में प्रकाशन की सराहना की।
श्री मोदी ने जेलों में बंद ऐसे कैदियों की समस्या को एकबार फिर न्यायपालिका के सामने उठाते हुए कहा कि बहुत से कैदी जमानत या जुमार्ने का पैसा न होने के कारण जेल से बाहर नहीं आ पाते और कई बार इसकी व्यवस्था हो भी जाती है तो उन्हें उनके घर से लेने वाले नहीं आते हैं।
इनमें से अधिकतर कैदी गरीब पृष्ठभूमि के होते हैं और उनके अपराध भी छोटे होते हैं। ऐसे कैदियों के प्रति सरकार और न्यायपालिका दोनों को संवेदनशील होना चाहिए। सरकार ने इस बार के बजट में ऐसे बंदियों की मदद के लिए अलग से बजट का धन प्रावधान किया है या केंद्र इस बजट से राज्यों को पैसा देगा ताकि वह ऐसे कैदियों की मदद कर सकें।
श्री मोदी ने धर्मो रक्षति, रक्षित: मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हित को सर्वोपरि रखकर काम करना, हमारा धर्म है, हम इस धर्म की रक्षा करें, इसी में हमारी रक्षा है।