Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
देश

भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर बोले राहुल गांधी- 52 साल भी मेरा कोई घर नहीं...

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर बोले राहुल गांधी- 52 साल भी मेरा कोई घर नहीं...
विज्ञापन
  • भारत जोड़ो यात्रा में मेरा घमंड खत्म हो गया : राहुल गांधी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस के राष्ट्रीय महाधिवेशन में बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अपने अनुभव को साझा किया। उन्होने कहा कि इस यात्रा के दौरान मुझे लोगों का ढेर सारा प्यार मिला। राहुल ने कहा कि केरल ने आपने वो बोट रेस देखी होगी, उस समय जब मैं नाव में बैठा था तो मेरे पैर में भयंकर दर्द था। मैं उस फोटो में मुस्कुरा रहा हूं, लेकिन मेरे दिल के अंदर रोना आ रहा था, इतना दर्द था। 

मैंने यात्रा शुरू की, काफी फिट आदमी हूं, 10-12 किलोमीटर ऐसे ही दौड़ लेता हूं, घमंड था, मैंने सोचा कि 10-12 किलोमीटर चल लेता हूं, 20-25 किलोमीटर में क्या बात है। पुरानी चोट थी, कॉलेज में चोट लगी थी फुटबॉल खेलते हुए। मैं दौड़ रहा था, मेरे दोस्त ने पीछे से अडंगी मार दी, घुटने में चोट लगी। दर्द गायब हो गया था सालों के लिए। अचानक जैसे ही मैंने यात्रा शुरू की दर्द वापस आ गया। आप मेरे परिवार हो तो मैं कह सकता हूं आपसे, सुबह उठता था तो सोचता था कि कैसे चला जाये, फिर सोचता था कि 25 किलोमीटर नहीं 3500 किलोमीटर चलना है, कैसे चलूंगा। जब कंटेनर से उतरता था, चलना शुरू करता था, लोगों से मिलता तो पहले 10-15 दिन में, जिसको आप अहंकार कह सकते हो, घमंड कह सकते हो, सारा गायब हो गया।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता ने मुझे मैसेज दिया, देखो तुम अगर निकले हो, अगर कन्याकुमारी से कश्मीर चलने निकलने हो तो अपने दिल से अहंकार मिटाओ, घमंड मिटाओ नहीं तो मत चलो। मुझे यह बात सुननी पड़ी। आहिस्ते-आहिस्ता मैंने देखा मेरी आवाज चुप होती गयी। पहले किसान से मिलता था, मैं उसको अपना ज्ञान समझाने की कोशिश करता था। लेकिन धीरे-धीरे सारा ज्ञान बंद हो गया, शांति सी आ गयी और सन्नाटे में मैं सुनने लगा, यह आहिस्ते-आहिस्ते बदलाव आया। 

जब मैं जम्मू कश्मीर पहुंचा मैं बिल्कुल चुप हो गया। 52 साल से मेरा घर नहीं राहुल ने कहा मैं छोटा सा था, 1977 की बात है, चुनाव आया, मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता था, मैं सिर्फ 6 साल का था। एक दिन घर में अजीब सा माहौल था, मैं मां के पास गया, मैंने पूछा क्या हुआ, उन्होंने कहा हम घर छोड़ रहे हैं। तबतक मैं सोचता था कि वह घर हमारा था, मैंने मां से पूछा हम अपने घर को क्यों छोड़ रहे हैं। पहली बार मां ने मुझे बताया, राहुल यह हमारा घर नहीं है, यह सरकार का घर है, अब हमे यहां से जाना है। 

मैंने पूछा मां कहां जाना है, कहती हैं नहीं मालूम कहां जाना है। मैं हैरान हो गया, मैंने सोचा था कि वह हमारा घर था। 52 साल हो गये, मेरे पास घर नहीं है, आजतक घर नहीं है, हमारे परिवार का जो घर है वह इलाहाबाद में है, वह भी हमारा घर नहीं है। जो घर होता है, उसके साथ मेरा अजीब सा रिश्ता है, मैं 12 तुगलक लेन में रहता हूं, लेकिन मेरे लिए वह घर नहीं है। 

भारत जोड़ो यात्रा में मेरा घर जब मैं कन्याकुमारी से निकला तो मैंने खुद से पूछा कि मेरी जिम्मेदारी क्या बनती है। मैं भारत का दर्शन करने निकला हूं, भारत को समझने निकला हूं, हजारों लाखों लोग चल रहे हैं, भीड़ है, मेरी क्या जिम्मेदारी है। मैंने थोड़ी देर सोचा और फिर मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने ऑफिस के लोगो को बुलाया और कहा देखिये यहां पर हजारों लोग चल रहे हैं, धक्का लगेगा, लोगों को चोट लगेगी, बहुत भीड़ है, हमे एक काम करना है, मेरे साइड में, मेरे 20-25 फुट आगे, जो जगह खाली है उसमे हिंदुस्तान के लोग आएंगे, हमसे मिलने आयेंगे, अगले चार महीने में वह हमारा घर है। यह घर हमारे साथ चलेगा। 

मैंने सबसे कहा देखिये इस घर में जो भी आएगा, अमीर हो, गरीब हो, बुजुर्ग हो, युवा हो, बच्चा हो, किसी भी धर्म का हो, राज्य का हो, हिंदुस्तान के बाहर का हो, जानवर हो, उसको यह लगना चाहिए, मैं अपने घर आया हूं। जब वह यहां से जाए उसे लगना चाहिए मैं अपने घर को छोड़कर जा रहा हूं। जिस दिन मैने यह किया, यह यात्रा बदल गयी, जादू से बदल गयी। लोग मेरे साथ राजनीतिक बात नहीं कर रहे थे, मैंने क्या-क्या सुना है मैं आपको बता नहीं सकता हूं।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 32,856