- भारत ने डॉलर को दिया बड़ा झटका
एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसी दूसरी करेंसी में तेल खरीदने को लेकर भारत और रूस के बीच काफी लंबे अर्से से बातचीत चल रही थी, लेकिन अब भारत सरकार के सूत्रों ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक नये मैकेनिज्म पर बात बन गई है। दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों ने कहा है कि भारतीय रिफाइनर्स ने संयुक्त अरब अमीरात की करेंसी, दिरहम में दुबई स्थिति व्यापारियों के माध्यम से रूसी तेल के एक बड़े हिस्से का भुगतान करना शुरू कर दिया है।
भारत और रूस के बीच दिरहम में शुरू हुए ट्रेड से अमेरिकी करेंसी डॉलर को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब चीन, ईरान और सऊदी अरब समेत कई ऐसे देश हैं, जो अपने स्थानीय करेंसी में व्यापार के नये तंत्र को विकसित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इससे बाजार में डॉलर की दादागीरी को बड़ा नुकसान होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को के खिलाफ लगाए गये पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को भारत मान्यता नहीं देता है, हालांकि भारत उन प्रतिबंधों का उल्लंघन भी नहीं करता है, लेकिन भारत और रूस के बीच पिछले साल से ही रुपया-रूबल व्यापार मैकेनिज्म को बनाने पर बात चल रही है, जो अभी तक फाइनल नहीं हो पाई है।
वहीं, भारतीय बैंक और वित्तीय संस्थान, रूस को किए जाने वाले भुगतान को लेकर सतर्क भी हैं, ताकि किसी भी तरह से पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो भारतीय रिफाइनर्स और व्यापारियों को इस बात को लेकर चिंता थी, कि अगर रूस कच्चे तेल की कीमत को जी-7 देशों के लगाये प्राइस कैप (60 डॉलर प्रति बैरल) से महंगा कर देता है, तो फिर वो डॉलर में भुगतान करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे, क्योंकि ये सीधे तौर पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध का उल्लंघन करता है।
लिहाजा, भारत सरकार भी भारतीय व्यापारियों के लिए किसी ऐसे विकल्प की तलाश में थी, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में अपनी अर्थव्यवस्था को डी-डॉलर करने के रूस के प्रयासों में भी सहायता कर सकता है। दुबई स्थिति बैंकों के माध्यम से भारतीय रिफाइनरों द्वारा रूसी कच्चे तेल के लिए दिरहम में व्यापारियों को भुगतान करने के पिछले प्रयास फेल हो गये थे, जिसकी वजह से भारतीय ट्रेडर्स को मजबूरी में फिर से डॉलर का ही सहारा लेना पड़ा था, लेकिन अब नये तंत्र से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गयी है।