- हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद स्थापित होगी 112 फीट ऊंची आदियोगी की दूसरी प्रतिमा
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक हाई कोर्ट ने चिक्कबल्लापुरा जिले में 15 जनवरी को ईशा योग केंद्र की आदियोगी प्रतिमा का अनावरण करने की अनुमति शुक्रवार को दे दी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उस स्थल पर निर्माण गतिविधियों को लेकर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने 11 जनवरी को निर्माण के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि ईशा योग केंद्र ने वनों और भूमि अधिग्रहण से संबंधित विभिन्न नियमों और कानूनों का उल्लंघन किया है।
ईशा योग केंद्र के वकील ने क्या कहा?
ईशा योग केंद्र के वकील ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति अशोक एस किंगई की खंडपीठ का रुख किया और दलील दी कि केंद्र का उद्घाटन 15 जनवरी को निर्धारित किया गया है, जिसमें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और अन्य गणमान्य लोग शिरकत करेंगे। अनावरण के संबंध में आमंत्रण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। ईशा योग केंद्र चिक्कबल्लापुरा जिले के अवलागुर्की में आदियोगी की 112 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित कर रहा है।
कोर्ट को बताया गया कि आयोजन के लिए कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और निर्माण गतिविधियां नहीं की जाएगी। कोर्ट ने इस दलील पर भी गौर किया और कहा कि कार्यक्रम किया जा सकता है, क्योंकि यह पहले से तय था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने न्यायालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि प्रतिमा के अनावरण के दौरान किसी भी तरह की आतिशबाजी नहीं की जानी चाहिए। इसके प्रत्युत्तर में न्यायालय ने कहा कि इस तरह के आयोजन नहीं होंगे क्योंकि इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति भाग लेने वाले हैं।
क्यों खास है प्रतिमा?
मामले की सुनवाई दो फरवरी के लिए स्थगित कर दी गयी। इस बबीच ईशा फाउंडेशन ने कहा कि उपराष्ट्रपति आदियोगी की प्रतिमा का 15 जनवरी को शाम 6 बजे तय कार्यक्रम के अनुसार अनावरण करेंगे। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। फाउंडेशन ने एक विज्ञप्ति में कहा कि छह साल पहले कोयम्बटूर के ईशा योग केंद्र में आदियोगी की 112 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया गया था।
बता दें, यह प्रतिमा आदियोगी की दूसरी प्रतिमा है जो पहली प्रतिमा की तरह की 112 फीट ऊंची है। कोयंबटर में भगवान शिव आदियोगी की पहली प्रतिमा गिनीज बुर आफ रिकॉर्ड में दर्ज है। आदियोगी की दूसरी प्रतिमा हूबहू पहली प्रतिमा की तरह ही है जिसमें भवगान शिव का चेहरा बनाया गया है। दुनिया ये इतनी ऊंची केवल चेहरे वाली अकेली प्रतिमा है।